होली

होली पर निबंध 2019 (रंगों के त्यौहार का महत्व)

होली पर निबंध हिंदी में

होली पर निबंध के इस लेख को शुरू करने से पहले आपको HindiParichay.com की और से होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ…! आज हम आपको होली के बारे में जानकारी देंगे| तो आईये शुरू करते है.

प्रिय मित्रों, मै आपको बता दूँ की होली 2019 आ चुका है तो आप सभी अपनी पिचकारियाँ बिलकुल तैयार कर लीजिये और गुब्बारे पानी के टब से बाहर निकाल लीजिये| दोस्तों, होली का त्यौहार आ चूका है तो अपने दोस्तों आदि के साथ होली पर खूब मोज मस्ती कीजिये.

मगर दोस्तों कृपया करके अपने दोस्तों आदि के साथ होली पर कोई गलत कार्य न करें और न ही किसी को गलत कार्य करने दीजिए.

होली का त्यौहार बड़ी ही खुशियों का त्यौहार होता है| इस दिन सभी दुःख दर्द और लड़ाई झगड़े भुला कर एक दुसरे को रंग लगाया जाता है.

होली से एक दिन पूर्व छोटी होली होती है और इस दिन होलिका दहन होती है| आज इस लेख में मै आपको होली से जुडी सारी जानकारी बताने का पूरा प्रयास करूंगा| तो आईये होली पर निबंध (Holi Essay in Hindi) के लेख को पढ़ना शुरू करते है.

होली पर निबंध हिंदी में – होली का महत्व

होली के त्यौहार का महत्व हिंदी में

होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार होता है| होली फाल्गुन मास में मनाई जाती है| होली का त्यौहार हिन्दू धर्म के अनुसार मनाया जाता है| होली के दिन घरों घरों में गुजिया, पापड़, पकोड़े, ठंडाई, हलवा, पानी-पूरी, खीर पूरी सब्जी जैसे पकवान आदि बनाएं जातें हैं.

होली का त्यौहार लोगों में एक दुसरे के प्रति चल रहे लड़ाई झगड़े आदि को खत्म कर एक नयी मित्रता की शुरुआत करती है| होली के दिन सभी, बच्चे, बड़े, बुजुर्ग अपने परिवार और आपसी लोगों के साथ बाहर आस पडोस के लोगों के साथ होली खेलतें है.

होली के दिन यह कोई मायने नहीं रहता है की होली का त्यौहार केवल हिन्दू ही मनाते हैं| होली का त्यौहार सभी जाति धर्म के लोग अपनी इच्छा के अनुसार मनातें हैं.

होली के त्यौहार में जाति धर्म की बेड़ियाँ बिच में नहीं आती है| जो चाहे जिसे चाहे रंग लगा सकता है मगर ध्यान रहे अगर कोई नहीं चाहता रंगों से खेलना तो उनके साथ केवल गले मिलकर और जो आपसे बड़े हैं तो पैर छु कर होली की बधाई दें.

होली के दिन रंगों से इसलिए खेला जाता है क्योंकि दुनिया के सभी रंग आपस में एक हो जातें हैं जो मनुष्य के बिच “एकता” के सम्बन्ध को दर्शाते हैं.

होली क्यों मनाई जाती हैं ? – Short Essay on Holi Festival in Hindi Language

होली का त्यौहार वसंत ऋतु के समय फाल्गुन मास के अंतिम दिन मनाई जाती है| फाल्गुन मास के खत्म होते ही किसान लोग बहुत ही खुश होते हैं क्योंकि इस दिन तक उनकी मेहनत और काफी लम्बे समय का इंतजार रंग लाता हैं.

उनकी मेहनत रंग लाती है, उनके द्वारा उगाई गई फसल पूरी तरह काटने के लिए तैयार रहती है.

होली की कहानी – होलिका की कहानी

होली के एक दिन पूर्व जिसे सभी छोटी होली के नाम से भी जानते हैं उस दिन होलिका का दहन हुआ था| होलिका राजा “हिरण्य कश्यप” की बहन थी| “हिरण्य कश्यप” राक्षस की तरह था जो ये चाहता था की लोग उसे भगवान समझे और उसकी पूजा करें.

अपने प्राणों से भी ज्यादा “हिरण्य कश्यप” को महत्व दें मगर भगवान को कुछ और ही मंजूर था| “हिरण्य कश्यप” के घर एक बालक ने जन्म लिया जिसका नाम प्रहलाद था जो बचपन से ही भगवान विष्णु जी को मानता था उनकी पूजा करता था.

प्रहलाद के विष्णु जी को भगवान माननें को लेकर “हिरण्य कश्यप” बड़ा ही चिंतित हो उठा| उसने कई बार अपने पुत्र को बोला की विष्णु भगवान नही है| तुम्हारा असली भगवान तुम्हारा अपना पिता है.

मगर प्रहलाद नें किसी की बात नहीं सुनी वो बचपन से ही श्रीहरी का जाप करता रहता था.

लाख बार समझाने पर जब प्रहलाद ने अपनी जिद नहीं छोड़ी तो “हिरण्य कश्यप” ने प्रह्लाड को मारने के कई प्रयत्न किये मगर असफल रहे.

प्रहलाद को जलती हुई तेल की कड़ाई में डाल दिया गया| मगर वो भी भगवान विष्णु की कृपया से जल बन गया| प्रहलाद के विद्यालय में राक्षश को भेजा उसे मारने के लिए मगर राक्षस भगवान विष्णु जी की कृपा से प्रहलाद को छु तक नहीं पाया.

“हिरण्य कश्यप” के कहने पर प्रह्लाद की माँ ने न चाहते हुए भी अपने पुत्र को विष (जेहर) वाला दूध पीने के लिए दिया और रोने लगी| मगर पहलाद ने वो दूध भी पी लिया और भगवान विष्णु जी की कृपा से प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ.

“हिरण्य कश्यप” ने प्रहलाद को रस्सी से बंधवा कर नदी में फैकना चाहा मगर पत्थर पानी पे तैरने लगा और प्रहलाद पत्थर के सहारे नदी के किनारे आ पहुंचा.

अंत में आकर “हिरण्य कश्यप” ने अपनी बहन होलिका को याद किया और “हिरण्य कश्यप” के कहने पर होलिका ने प्रहलाद को अपनी गोद में लिया और अग्नी में बैठ गयी.

होलिका को भगवान शिव जी की तरफ से एक चुनरी भेटं दी थी जिसकी वजह से होलिका को अग्नि कुछ भी नहीं करती| मगर भगवान की मंजूरी पर वही चूनरी प्रहलाद पर जा पड़ी और होलिका भस्म हो गयी.

तभी से इस दिन को होलिका के देहन के रूप में मनाया जाने लगा.

बाद में “हिरण्य कश्यप” को भगवान विष्णु जी के हाथों सजा मिल गई| होलिका दहन के दिन लोग लकड़ियाँ इकठ्ठी कर और घांस फूस आदि के जरिये एक घेरे में आग लगा कर खुशियाँ बांटते हैं.

घरों की औरते बेटियाँ आदि होलीका की पुजा करती हैं इस दिन लोग अपनी सभी बुराइयों को होलीका में जला देतें हैं होलीका की पूजा के बाद अगले दिन लोग अपने परिवार आस पड़ोस रिश्तेदार के साथ होली खेलतें हैं| होली के दिन अच्छाई की जीत और बुराई की हार हुई थी.

होली पर निबंध – Short Note on Holi in Hindi For Class 1 to 10

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होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन माना जाता है| होली का त्यौहार वसंत ऋतु के समय फाल्गुन मास के अंतिम दिन मनाया जाता है.

होली पर लोगों के घरों में इस दिन गुझिया, पापड़, पकोड़े, ठंडाई, हलवा, पानी-पूरी, खीर पूरी सब्जी जैसे पकवान आदि बनाएं जातें हैं| होली हिन्दुओं का त्यौहार हैं ये भारत में मनाया जाता है.

इस दिन लोग रिश्तेदारों के साथ परिवार वालों के साथ रंगों से खेलते हैं| दोस्तों से मिलते हैं, खूब मौज मस्तियाँ करते हैं| आते जाते हुए लोगों को बुरा न मानो होली है कह कर रंगों से रंग देतें है.

इस दिन कोई बुरा नहीं मानता और शायद कुछ बड़े लोग बुरा मान भी जाते हैं मगर होली के दिन कोई गुस्सा नहीं करते है.

छोटी होली को स्कूल में मानया जाता है स्कूल के बच्चे अपने साथ पढ रहे बच्चो और अपने अध्यापकों के साथ भी होली खेलना पसंद करते है.

होली से एक दीन पहले होलिका दहन होती हैं| होलिका राजा “हिरण्य कश्यप” की बहन थी और “हिरण्य कश्यप” अपने आप को भगवान समझता था| “हिरण्य कश्यप” का पुत्र भगवान विष्णु जी को मानता था.

“हिरण्य कश्यप” अपने बेटे की इस बात पर उसे कई बार विष्णु जी की पूजा करने के लिए मना करता रहा मगर प्रहलाद ने नहीं सुनी और कई बार “हिरण्य कश्यप” ने प्रहलाद को मारने की कोशिश की मगर असफल रहा.

फिर मौक़ा पा कर अपनी बहन होलिका के साथ अग्नी में प्रहलाद को बिठा दिया| होलिका को भगवान शिव की कृपा से एक चुनरी हांसिल थी जिसकी वजह से होलिका को अग्नि कुछ नहीं कर सकती थी.

मगर भगवान विष्णु जी की कृपा से प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका जल कर भस्म हो गयी और बुराई पर अच्छाई की जीत हुई| इसलिए कहा जाता है की बुरा करोगे तो बुरा होगा.

होली पर पूजा करने की विधि – Holi Puja Vidhi in Hindi 2019

होलिका दहन करने से पहले विधिवत पूजा होनी है और दहन के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है फिर होलिका को अग्नि दी जाती है।

पूजा के लिए इस दिन जल, रोली, फूल माला, चावल गुड़ और नई पकी फसल के पौधों की बालियां रखें। होलिका दहन के शुभ मुहूर्त के समय चार मालाएं होलिका को अर्पित की जाती है। इसके बाद तीन या सात बार होलिका की परिक्रमा होनी चाहिए.

शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान करना चाहिए और ध्यान रखें कि जब भद्राकाल चल रहा हो तो इस दौरान होलिका दहन नहीं होना चाहिए। भद्राकाल के समय होलिका दहन शुभ नहीं माना जाता है।

पंचाग के अनुसार  इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 8 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। (2018)

होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पहले ही होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सुखी लकड़ी, सूखी खास, सूखे उपले, व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है.

जिस दिन यह कार्य किया जाता है, उस दिन को होलाष्टक प्रारंभ का दिन भी कहा जाता है। जिस स्थान पर होली का डंडा स्थापित किया जाता है, वहां के संबंधित क्षेत्रों में होलिका दहन होने तक कोई शुभ कार्य संपन्न नहीं किया जाता.

उसके बाद होलाष्टक से लेकर होलिका दहन के दिन तक हर दीन कुछ लकडि़यां इकट्‍ठी करके उसमें डाली जाती है। इस प्रकार होलिका दहन से पहले यहां लकडियों का ढेर बन जाता है। फिर मोहल्ले के व् गाँव के सभी निवासी होलिका दहन करके अच्छे जीवन की कामना करते है और बच्चों की मंडली होली खेलने में लग जाती हैं.

5 दिनों तक मनाए जाने वाले होली के इस पावन पर्व पर सभी के घरों में गुझियाँ, ठंडाई, पकोड़े, पानी-पूरी, खीर, पूरी सब्जी, भजिए-श्रीखंड और पूरन-पोली बनाकर होली का त्यौहार मनाया जाता है.

होली पर कविता हिंदी में – Best Poem on Holi in Hindi For School Students

Best Poem on Holi in Hindi For School Students

देखो-देखो होली है आई
चुन्नू-मुन्नू के चेहरे पर खुशियां हैं आई
मौसम ने ली है अंगड़ाई।

शीत ऋतु की हो रही है बिदाई
ग्रीष्म ऋतु की आहट है आई
सूरज की किरणों ने उष्णता है दिखलाई
देखो-देखो होली है आई।

बच्चों ने होली की योजना खूब है बनाई
रंगबिरंगी पिचकारियां बाबा से है मंगवाई
रंगों और गुलाल की सूची है रखवाई
जिसकी काका ने अनुमति है नहीं दिलवाई।

दादाजी ने प्राकृतिक रंगों की बात है समझाई
जिस पर सभी बच्चों ने सहमति है जतलाई
बच्चों ने खूब मिठाइयां खाकर शहर में खूब धूम है मचाई
देखो-देखो होली है आई।

होली ने भक्त प्रहलाद की स्मृति है करवाई
बच्चों और बड़ों ने कचरे और अवगुणों की होली है जलाई
होली ने कर दी है अनबन की सफाई
जिसने दी है प्रेम की जड़ों को गहराई।

बच्चों! अब है परीक्षा की घड़ी आई
तल्लीनता से करो पढ़ाई वरना सहनी पड़ेगी पिटाई
अथक परिश्रम, पुनरावृत्ति देगी सफलता
अपार जन-जन की मिलेगी बधाई
होगा प्रतीत ऐसा होली-सी खुशियां हैं फिर लौट आई
देखो-देखो होली है आई।
साभार- देवपुत्र
लेखक – श्रीमती ममता असाटी

होली के दिन क्या न करें – होली पर निबंध और महत्व

होली खुशियों का त्यौहार है मगर में होली के बारें में कुछ बातें आपको बताने जा रहा हूँ जो बेहद जानने योग्य हैं.

जल विभाग की तरफ से ये समाचार सामने आया है की होली पे कई लीटर पानी बर्बाद हो जाता है और इस बार भी ऐसा ही होना है तो कृपया करके होली पर जहां तक हो सके पानी का इस्तेमाल न करें और गुलाल आदि से होली मनाये.

होली के दिन शराब पी कर गाडी वाहन आदि न चलायें इस दिन केवल होली मना कर खुशियाँ बाटना होता है मगर किसी गलती की वजह से किसी और के घर को दुःख झेलना पड़ता है.

आपसे अनुरोध है कृपया करके शराब का सेवन न करें और यदि आप ऐसा करते हैं तो घर में ही रह कर होली का आनंद ले.

प्रिय छात्रों, मुझे उम्मीद है की होली पर निबंध का यह लेख आपको अच्छा लगा होगा, आपको होली की सारी जानकारी मिल गई होगी|

अगर आपको अभी भी होली के विषय में कुछ पूछना है तो आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हो और जितना हो सके इस लेख को फेसबुक, ट्विटर, गूगल+, व्हाट्सएप्प इत्यादि पर शेयर जरुर करें. “धन्यवाद” आपको होली की हार्दिक शुभकामनाएँ..!

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