आरती / चालीसा / भजन हनुमान जयंती

Shree Hanuman Chalisa in Hindi – सभी भक्तों के लिए हिंदी में हनुमान चालीसा अर्थ सहित

Shree Hanuman Chalisa in Hindi Free Download
-विज्ञापन-

आप सभी भक्तों का HindiParichay.com पर हार्दिक स्वागत है| आज का हमारा शीर्षक “Shree Hanuman Chalisa in Hindi” के ऊपर है| जिसके जरिये आप Shree Hanuman Chalisa Lyrics Download कर पाओगे.

हनुमान चालीसा का अर्थ हिंदी में ?

“जय श्री राम”

सम्पूर्ण हनुमान चालीसा अर्थ सहित हम सबके लिए लिखी गयी है, हनुमान चालीसा, हनुमान जी के जीवन के बारे में व्याख्या करती है.

-विज्ञापन-

हनुमान चलीसा महान कवी तुलसीदास जी के द्वारा लिखी गयी है, तुलसीदास जी ने हनुमान जी के सभी गुण पराक्रम शक्तियाँ उपकार आदि हनुमान चालीसा के माध्यम से प्रकाशित की हैं.

हनुमान जी क्या हैं? ये तो हम सभी जानते ही हैं मगर तुलसीदास जी ने हनुमान चलीसा लिख कर हम सभी के लिए बहुत ही बड़ा उपकार किया है.

हनुमान जी की श्री राम जी के लिए प्रेमभक्ति को भी हनुमान चालीसा में व्यक्त किया गया है|

हनुमान चलीसा का जाप और हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी रोग दोष नष्ट होते हैं| हनुमान जी की चालीसा का दिन में 2 बार पाठ करने से मन को शांति मिलती है.

-विज्ञापन-

हनुमान मन्त्र ही हनुमान चालीसा को कहा जा सकता है| तो चलिए सम्पूर्ण हनुमान चालीसा अर्थ सहित की व्याख्या करते हैं.

हनुमान चालीसा वीडियो डाउनलोड गुलशन कुमार

Shri Hanuman Chalisa in Hindi Free Download

Shri Hanuman Chalisa in Hindi Free Download

⇓ हनुमान चालीसा के दोहे ⇓

-विज्ञापन-

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।

अर्थ : श्री गुरु जी महाराज के चरण (पैर) कमलों की धूल से अपने मन के दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश की व्याख्या करता हूं, जो चारों फलों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाले है.

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहूँ कलेश विकार।

अर्थ : हे प्रभु हे पवन कुमार ! मैं आपको हमेशा याद करता हूँ | ये तो आप जानते ही हैं की मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल हैं मुझे शारीरिक बल, सद्‍बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखों व दोषों का नाश कर दीजिए।

मनोकामना पूरी करने वाली हनुमान चालीसा की चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।। (1)

अर्थ : जय हनुमान जी ज्ञान और गुण के आप में सागर सामन है, तीनो लोकों में आपका स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है। हे पवनपुत्र अंजनी नंदन! आपके जैसा दूसरा बलवान नहीं है।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।। (1)

अर्थ : जय हनुमान जी ज्ञान और गुण के आप में सागर सामन है, तीनो लोकों में आपका स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है। हे पवनपुत्र अंजनी नंदन! आपके जैसा दूसरा बलवान नहीं है।

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।। (2)

अर्थ : हनुमान जी आप महान वीर और बलवान हैं, आपके अंग बज्र के समान हैं। आप कुमति यानि खराब और नकारात्मक बुद्धि को दूर कर सुमति यानि सद्बुद्धि प्रदान करते हैं, आपका रंग स्वर्ण (सोने) के समान है, और आप सुंदर वेश धारण करने वाले हैं, आप सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मुँज जनेऊ साजै।।
शंकर सुवन केसरी नन्दन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। (3)

अर्थ : आप के हाथों में गदा और झंडा (ध्वज) है और कन्धों पर मुंज का जनेऊ आपकी शोभा दर्शाता है, आप भगवान शिव के अंश हैं और केशरी के पुत्र हैं, आपके पराक्रम और महान यश की पुरे संसार में वंदना होती है.

विध्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। (4)

अर्थ : आपमें विध्या अपार है आप गुणी और अत्यंत बुद्धिमान हैं, प्रभु श्रीराम जी के सभी कार्यों को करने के लिए आप हमेशा तैयार रहते हैं,प्रभु राम जी की कथा उनका नाम आपको सुनना बहुत अच्छा लगता है, प्रभु राम माता सीता और लक्ष्मण जी आपके दिल में रहते हैं| (हनुमान जी श्री राम जी की कथा इतनी भाति हैं की वो हर कथा में किसी न किसी रूप में पहुँच जाते हैं)

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे।। (5)

अर्थ : आपने बहुत ही छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप धारण करके लंका को जलाया| आपने विशाल रूप धारण कर असुरों का संहार किया, श्री राम जी के सभी कार्य आप ने सवारें.

लाय संजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। (6)

अर्थ : हनुमान जी ने संजीवनी बूटी ला कर लक्ष्मण जी को जीवन दिया,और भगवान श्री राम जी के दिल को जीत लिया,जिस पर श्री राम जी ने आपको खुशी से गले लगाया और कहा की आप भी मेरे भाई लक्ष्मण की तरह हैं.

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। (7)

अर्थ : श्री राम जी ने आपको यह कह कर दिल से लगा लिया की आपका यश हजारों मुखों से गाने लायक है। श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि ऋषि मुनि ब्रह्मा आदि देवता, नारद जी सरस्वती जी और शेषनाग जी सभी आपका गुणगान करते हैं।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। (8)

अर्थ : यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान्, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णत: वर्णन नहीं किया जा सकता, आपने ही सुग्रीव जी को श्री राम जी के साथ मिला कर बहुत बड़ा उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने.

तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। (9)

अर्थ : आपकी बात को ही  मानकर विभीषण लंका का राजा बना सम्पूर्ण संसार इस बात को जानता है। जो सूर्य यहां से मीलों की दूरी पर स्थित है जिस तक पंहुचने में ही हजारों युग लग जाएं उस सूरज को आपने एक मीठा फल जान कर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। (10)

अर्थ : आपने श्री राम जी की अंगूठी को मुंह के अन्दर रख कर समुन्द्र को लाँघ दिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है,संसार के सभी कठिन काम आपकी कृपा से सरल हो जाते हैं.

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हरी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।। (10)

अर्थ : श्री राम जी के दरवाजे पर आप रक्षक की तरह तैनात हैं, इसलिए आपकी अनुमति, आपकी आज्ञा के बिना कोई भगवान राम जी तक नहीं पंहुच सकता। भिन्न प्रकार के सुख आपकी शरण लेते हैं। इसलिए जिसके रक्षक आप होते हैं, उसे किसी तरह से भी डरने की जरुरत नहीं होती।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। (11)

अर्थ : हनुमान जी आपके तेज को आप ही सभाल सकते हो, आपकी ललकार से दहाड़ से तीनों लोक कापते फिरते हैं, भूत पिसाच पास नहीं आते हनुमान जी आपका जहां भी नाम लिया जाता है.

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। (12)

अर्थ : हनुमान जी आपका नाम निरंतर लेने से सभी प्रकार के रोग और दुःख दर्द चले जाते हैं, हे महाराज, हर समय अपने विचारों, कर्मों और वाणी में जो भी आपका नाम लेते हैं, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उन्हें सभी संकटों से आप छुडाते हो.

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। (13)

अर्थ : राम जी एक तपस्वी राजा हैं जो सबसे बड़े हैं, आपके द्वारा उनके सभी काम सरलता से हुए हैं, जो कोई मन की इच्छा आपके पास रखता है, वे अनन्त और असीम जीवन का फल प्राप्त करता है.

चारों जुग परताप तुम्हारा।। है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। (14)

अर्थ : चारों युगों, सतयुग,त्रेता, द्वापर, और कलयुग में आपका यश फैला हुआ है, संसार में अपकी कीर्ति सभी जगह प्रकाशित है| आप राम जी के दुलारे हैं, आप अच्छे लोगों की रक्षा करते हैं, और दुष्टों का नाश करते हैं.

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। (15)

अर्थ : सीता माता द्वारा आपको प्राप्त वरदान के अनुसार आप किसी को भी आठों सिद्धियों और नो निधियां दे सकते हैं| राम जी शरण में रहने से आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नामक औषधी है. अष्ट सिद्धि का अर्थ है,

-विज्ञापन-
  1. अणिमा ⇒ जिससे साधक किसी को दिखाई नहीं पड़ता और कठोर से कठोर पदार्थ में प्रवेश कर जाता है.
  2. महिमा ⇒ जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है.
  3. गरिमा ⇒ जिसमे साधक जितना चाहे अपने को भारी बना सकता है.
  4. लघिमा ⇒ जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है.
  5. प्राप्ति ⇒ जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है.
  6. प्राकाम्य ⇒ जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है.
  7. ईशित्व ⇒ जिससे सब पर शासन का सामर्थ्य हो जाता है.
  8. वशित्व ⇒ जिससे दूसरों को वश में किया जाता है.

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दु:ख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि–भक्त कहाई।। (16)

अर्थ : आपका गुणगान करने से श्री राम जी की प्राप्ति होती है और जन्म जन्मान्तर के दुःख दूर होते हैं, अंतिम समय श्री राम जी के धाम को जाते हैं और यदि फिर जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे.

और देवता चित्त न धरई। हनुमत् सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। (17)

अर्थ : हे भगवान आपकी सेवा करने से सभी प्रकार के सुख मिलते है, और फिर किसी अन्य भगवान की आवश्यकता ही नही रहती.जो कोई आपका सुमीरन करता है उसके सब संकट कट जाते हैं और सारी पीड़ा मिट जाती है.

जय जय जय हनुमान गौसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो सत बार पाठ कर कोई। छुटहि बंदि महासुख होई|| (18)

अर्थ : अपकी जय हो,जय हो, जय हो, आप मुझ पर कृपालु गुरु जी के सामान कृपा कर दीजिये, जो कोई हनुमान चालीसा का 100 बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परम आनंद प्राप्त होगा.

जो यह पढ़ै हनुमान् चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।। (19)

अर्थ : भगवान शंकर जी द्वारा हनुमान चालीसा को लिखवाया गया है, जिस प्रकार वे जानते है, की जो भी इसे पढेगा वो निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करेगा, हे हनुमान जी, तुलसीदास जी सदा ही श्री राम जी के दास हैं, इसलिए आप भी उनके ह्रदय में वास किजिये.

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।। (20)

अर्थ : हे पवनपुत्र, संकटों को हर लेने वाले संकट मोचन, हे कल्याणकारी, हे देवराज आप भगवान श्री राम, माता जानकी और लक्ष्मण सहित मेरे ह्रदय में निवास करों.

हनुमान जी का जन्म कब हुआ ? हनुमान जी का जन्म किस तरह और कैसे हुआ ?

Lord Hanuman Ji Images Free Download

एक बार अयोध्या के राजा दशरथ अपनी पत्नियों के साथ पुत्रेष्टि हवन कर रहे थे। यह हवन पुत्र प्राप्ति के लिए हो रहा था। हवन समापन के बाद गुरुदेव ने प्रसाद की खीर तीनों रानियों में थोड़ी थोड़ी बांट दी।

खीर का एक छोटा सा भाग एक कौआ अपने साथ एक जगह ले गया जहा अंजनी मां तपस्या कर रही थी। यह सब भगवान शिव और वायु देव के इच्छा अनुसार हो रहा था.

तपस्या करती अंजनी जी के हाथ में जब खीर आई तो उन्होंने उसे शिवजी का प्रसाद समझ कर ग्रहण कर लिया। इसी प्रसाद की वजह से हनुमान का जन्म हुआ। जभी से हनुमान जी महादेव् शिव के ग्यारवे अवतार अर्थार्त उनके रूद्र अवतार है.

एक समय जब हनुमान जी के पास कोई रास्ता नहीं था श्री राम जी से मिलने का तो महादेव जी ने ही हनुमान जी को साधारण बंदर बना कर मदारी के रूप में श्री राम जी के घर अयोध्या ले गए थे तब के बाद से ही राम जी और हनुमान जी का आपस में अटूट प्रेम जीवित हुआ.

हनुमान जी ने सूर्य देव को क्यों खाया ? – Lord Hanuman Story in Hindi For Kids

हनुमान जी अपने कक्ष में विश्राम कर रहे थे और उनको और अचानक उनको बड़ी जोर की भूख लगी और उनकी नजर खिड़की के बाहर एक पेड़ पर पड़ी उन्हें लगा की एक लाल पिला फल पेड़ पर लटक रहा है और फिर क्या हुआ की हनुमान जी ने एक लम्बी छलांग लगा दी| उस बाल अवस्था में हनुमान जी बेहद नटखट थे.

जब हनुमान जी के सूर्य के पास जाने से सूर्य बड़ा होने लगा तो हनुमान जी को गुस्सा आया और हनुमान जी ने कहा की इतना बड़ा फल मैंने आज तक नहीं खाया अब तो इसे जरुर खाऊंगा.

हनुमान जी ने सूर्य भगवान को निगल लिया था| बाद में इंद्र देव के वज्र प्रहार से हनुमान जी मुर्चित हो कर नीचे की और गिरने लगे, मगर वायु देव ने ऐसा नहीं होने दिया, उन्होंने गिरते हुए हनुमान जी को बचा लिया.

वायु देव जी के क्रोध से सभी प्राणी बिना वायु के मरने लगे तभी सभी भगवानों के पूछने पर वायु देव ने सारी घटना सुनाई जिस कारण तीनों देवो ने हनुमान जी को वरदान दिया की जब तक वे चाहे तो किसी भी प्रकार का अस्त्र सस्त्र उनका कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा.

हनुमान चालीसा हिंदी में डाउनलोड करें – Shree Hanuman Chalisa in Hindi Download

⇓ सम्पूर्ण हनुमान चालीसा डाउनलोड हिंदी में ⇓

|| दोहा ||
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

॥ चौपाई ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।1।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।2।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।3।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।4।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।5|

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।6।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।7।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।8।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।9।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।10।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।11।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।12।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।13।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।14।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।15।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।16।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।17।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।18।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।19।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।20।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।21।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।22।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।23।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।24।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।25।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।26।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।27|

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।28।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।29।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।30।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।31।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।32।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।33।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।34।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।35।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।36।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।37।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।38।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।39।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।40।

|| दोहा ||
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

हनुमान जी की चालीसा हिंदी में (Hanuman Chalisa in Hindi) पढ़ कर आप सभी को आनंद आया होगा, हनुमान चलिसा का अर्थ समझने में आपको कोई तकलीफ नहीं हुई होगी| तो जरूर हनुमान जी के लिए भक्ति दिखाइए, अपने मित्रों आदी में शेयर करके उन्हें भी हनुमान चालीसा का सम्पूर्ण ज्ञान बताइए.

आप हनुमान जी की सम्पूर्ण चालीसा व्हाट्सएप्प, फेसबुक, ट्विटर आदि सोशल मिडिया पे शेयर कर सकते है| अपने मित्रों को जरुर बताएं हनुमान चालीसा के बारे में.

||धन्यवाद||

“जय श्री राम” “जय हनुमान जी” “जय बालाजी महाराज की”

अन्य लेख ⇓

About the author

Hindi Parichay Team

हमारी इस वेबसाइट को पड़ने पर आप सभी का दिल से धन्यवाद, हमारी इस वेबसाइट में आपको दुनिया भर के प्रशिद्ध लोगों की जानकारी मिलेगी और यदि आपको किसी स्पेशल व्यक्ति की जानकारी चाहिए और किसी कारण वो हमारी वेबसाइट पे न मिले तो कमेंट बॉक्स में लिख दें हम जल्द से जल्द आपको जानकारी देंगे|

Leave a Comment