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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय व् उनके द्वारा किये गए कार्य

नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय

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नाम :नरेंद्र दामोदरदास मोदी
जन्म :17 सितम्बर 1950 बडनगर जि.मेहसाना (गुजरात)
पिता :श्री दामोदरदास मूलचंद मोदी
माता :श्रीमती हीराबेन मोदी
पत्नी :श्रीमती जसोदा बेन चमनलाल
भाइ-बहन के नाम :सोमाभाई मोदी, अमृत मोदी, प्रहलाद मोदी, पंकज मोदी, वासंती (बहन)
पार्टी :भारतीय जनता पार्टी
प्रधानमंत्री पद :15वें प्रधानमंत्री
मोदीजी का कद :170 से.मी. /5’7″फुट
वजन :68 किलो ग्राम
आँखों का रंग : काला
बालों का रंग :सफ़ेद
उम्र (2017) :67 वर्ष
राशी :कन्या

नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय हिंदी में

17 सितम्बर 1950 को बडनगर मेहसाना डिस्ट्रिक (बाम्बे) में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी एवं माता का नाम हीराबेन मोदी है.

नरेंद्र मोदी के पिता एक साधारण तेलीय  जाति के व्यक्ति थे| जिनकी 6 संताने थी जिनमे तीसरे नरेंद्र मोदी थे नरेंद्र मोदी अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टॉल लगाते थे उन्हें पढने का बहुत शौक था पर उनके शिक्षक के अनुसार वे कुशल वक्ता थे.

वाद विवाद में नरेंद्र मोदी को कोई पकड़ नहीं सकता था| मोदी जी ने बडनगर के एक स्कूल से पढाई पूरी की थी व् सन् 1980 में गुजरात के विश्वविद्यालय से राजनिति विज्ञान में ग्रेजुएशन (graduation) पूरी की और उस समय वो RSS के प्रचारक भी थे.

नरेंद्र मोदी की जीवनी – नरेंद्र मोदी की पत्नी

Narendra Modi Wife iMAGE

उनकी सगाई 13 वर्ष में ही हो गयी थी जसोदा बेन चमनलाल से और उनकी शादी 17 वर्ष की उम्र में हो गयी थी.

मगर शादी के बाद भी फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के अनुसार वो दोनों साथ में कई वर्ष तक रहे और बाद में अलग अलग रहने लगे जिसमे केवल नरेंद्र मोदी की इच्छा थी| और कुछ लेखकों का कहना है की “उन दोनों की शादी जरुर हुई परन्तु वे दोनों कभी एक साथ नहीं रहे.

शादी के कुछ वर्षों बाद मोदी जी ने घर का त्याग कर दिया था और एक तरीके से उनका वैवाहिक जीवन समाप्त ही हो गया था.

मोदी जी की इस शादी वाली बात पर बड़ा बखेड़ा हुआ था| हालाँकि उन्होंने पिछले चार विधान सभा चुनावों में अपनी बीती हुई शादीशुदा जिंदगी के बारे में कभी जिक्र भी नहीं किया है और उनका कहना है की शादीशुदा जिंदगी की बात ना बता कर उन्होंने कोई पाप नहीं किया है.

उनका मानना है की एक शादीशुदा के मुकाबले बिना शादी वाला व्यक्ति भ्रष्टाचार से ज्यादा लड़ सकता है क्यूंकि उसे अपनी पत्नी और बच्चों की कोई चिंता नहीं रहती है और वो भ्रष्टाचार के खिलाफ आसानी से लड़ सकता है|और तो और उन्होंने शपथ पत्र दिखा कर, जसोदा बेन को अपनी पत्नी स्वीकारा है.

नरेंद्र मोदी के बारे में (बचपन)

नरेंद्र मोदी जी का बचपन बडी ही गरीबी में गुजरा उनके पिता जी की चाय की दुकान थी और उनकी माँ दुसरो के घरो में बर्तन साफ किया करती थीं! दो वक्त का खाना भी बहुत मुश्किल से मिलता था.

मोदी जी बहुत छोटे एवं कच्चे घर में उनका बचपन बीता! उनका जीवन बहुत संघर्ष वाला था उन्होंने अपने बचपन में ही बहुत उतार चड़ाव देखे थे.

वह बचपन से ही स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपना आदर्श मानते थे| और उन्हें बचपन से ही पढ़ने का बहुत शोक था| कुछ पारिवारिक समस्याओ के कारण 1967 में 17 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया.

वह घर छोड़ने के बाद कई आश्रम और मठो में अपना जीवन व्यतीत करने लगे| इन्ही दिनों में इन्होने बहुत दुनिया देख ली थी बहुत सोच विचार के बाद ये दो वर्ष बाद वापस घर आ गये.

इन सबके बाद मोदी जी (R.S.S.) आर.एस.एस. के सदस्य बने और फिर उन्होंने काम बहुत इमानदारी से किया, लेकिन इन सबके बावजूद भी उन्होंने पढाई जारी रखी और पॉलिटिक्स में डिग्री हासिल की| वह लोगो की समस्याओ, उनकी मुसीबतों को सुनते और दूर करने की कोशिश करते.

नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर

नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर

वे विश्वविद्यालय पड़ते समय वे राष्ट्रिय स्वंयसेवक संघ की शाखा में जाने लगे थे| उन्होंने शुरुआत से ही राजनीतिक में अपनी रूचि दिखाई और भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने की प्रमुख भूमिका दिखाई.

गुजरात में “शंकरसिंह वाघेला” का जनाधार मोदी जी की वजह से बहुत मजबूत हो गया था.

अप्रैल 1990 में केंद्र में मिली जुली सरकारों का समय आया और मोदी जी की महमंत ने रंग दिखाया “भारतीय जनता पार्टी” ने अपने बलबूते दो तिहाई बहुमत प्राप्त कर 1995 में अपनी सरकार बनाई और उस समय दो राष्ट्रिय घटना हुईं.

पहली घटना में हुआ ये की अडवानी जी ने सोमनाथ से ले कर अयोध्या तक की रथयात्रा निकाली जिसमे प्रमुख सारथी का काम मोदी जी ने किया| और इसी प्रकार कन्याकुमारी से लेकर सुदूर उत्तर में स्थित कश्मीर तक की मुरली मनोहर जोशी ने रथयात्रा भी मोदी की देखरेख में ही हुई.

इसके बाद “शंकरसिंह वाघेला” ने पार्टी से त्यागपत्र .दिया और केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया गया और मोदी जी को दिल्ली बुला कर भाजपा में संगठन की दृष्टि से केन्द्रीय मंत्री बना दिया गया.

1995 में मोदी जी को प्रमुख पांच राज्यों में पार्टी संघटन का काम दिया गया जिसे मोदी जी ने किया भी| 1998 में उन्हें राष्ट्रिय महामंत्री संघठन सौंपा गया और उस पद पर 2001 तक मोदी ने काम किया और 2001 में केशुभाई को हटा कर मुख्यमंत्री के पद पर मोदी जी को मुख्यमंत्री बना दिया गया.

गुजरात में मोदी जी का काम मुख्यमंत्री के रूप में

केशु भाई की तबीयत कुछ ख़राब होने लगी थी और भाजपा चुनाव में कई सीटें हार चुकी थी जिसके कारण उन्हें 2001 में मोदी जी को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्यमंत्री के रूप में उम्मीदवार बनाया.

हालाँकि मोदी जी चाहते थे की गुजरात की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं को मिले जिसके कारण पटेल के उप मुख्यमंत्री बनने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और अटल बिहारी बाजपेयी और लालकृष्ण अडवाणी से कहा की:-

अगर मुझे मुख्यमंत्री बनाना है तो अकेले का बनाओ जिस कारण 03 अक्टूबर 2001 को यह मुख्यमंत्री बने और 2002 में होने वाले चुनाव की पूरी जिम्मेदारी उन्हें पर थी.

सन् 2001-02

07 अक्टूबर 2001 को मुख्यमंत्री कार्यकाल का पहला दिन शुरू था| और इसके बाद मोदी जी ने राजकोट चुनाव लड़ा और कोंग्रेस पार्टी के अश्विन मेहता को 14728 मतों से हारना पड़ा.

नरेंद्र मोदी जी वैसे तो अपने कर्मशील व्यव्हार के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने गुजरात में भी कई हिंदु मंदिरों को तुडवाने में कोई हस्तक्षेप नहीं किया क्यूंकि वो मंदिर क़ानूनी कायदे से दूर थे.

इस हरकत से उन्हें विश्व हिन्दू परिषद जैसे संघटनो से भला बुरा सुनने को मिला| उन्होंने कोई परवाह नहीं की क्यूंकि उन्हें लगता है की वह सही कर रहे हैं.

उन्हें कुर्ता पजामा पहनना बहुत अच्छा लगता है पर कभी-कभी सूट भी पहन लेते हैं| वैसे उनकी मात्रभाषा गुजराती है पर वे हिंदी और अंग्रेजी भाषा भी बोल लेते हैं.

मोदी जी की देख रेख में 2012 में हुए गुजरात विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत प्राप्त किया और भाजपा को इस बार 115 सीटें मिली.

गुजरात की विकास योजना – नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय

नरेंद्र मोदी की जीवनी

मुख्यमंत्री होने के बाद मोदी जी ने गुजरात में विकास किया व् उनकी योजनायें निम्नलिखित हैं.

  1. पंचामृत योजना ⇒ राज्य के एक जुट विकास की योजना |
  2. सुजलाम सुफलाम ⇒ राज्य में जलस्रोतों का उचित व् बिना बर्बाद किये उपयोग, जिससे जल बर्बाद न हो |
  3. कृषि महोत्सव ⇒ उपजाऊ भूमि के लिए शोध प्रयोगशालाएं |
  4. चिरंजीवी योजना ⇒ जन्म लेने वाले बच्चे की मृत्युदर में कमी लाने के लिए |
  5. माँ वंदना ⇒ जच्चा –बच्चा के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए |
  6. बेटी बचाओ ⇒ भ्रूणहत्या व् लिंगानुपात पर अंकुश हेतु |
  7. ज्योतिग्राम योजना ⇒ प्रत्येक गाँव में बिजली पहुँचाने के लिए |
  8. कर्मयोगी अभियान ⇒ सरकारी कर्मचारियों में अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा जगाने के लिए|

मोदी ने आदिवासियों के लिए विकास किये

  • पांच लाख लोगों के परिवार को रोजगार|
  • ऊँचे स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता
  • आर्थिक विकास
  • स्वास्थय
  • आवास
  • साफ स्वच्छ पिने का जल
  • सिंचाई
  • सब जगह बिजली
  • प्रत्येक मौसम में सड़क मार्ग की उपलब्धता
  • शहरी विकास |

आतंकवाद पर मोदी के विचार

“आतंकवाद युद्ध से भी बदतर है | एक आतंकवादी के कोई नियम नहीं होते | एक आतंकवादी तय करता है की कब, कैसे कहाँ और किसे मारना है | भारत ने युद्धों की तुलना में आतंकी हमलों में अधिक लोगों को खोया है|” – मोदी जी ने कहा

18 जुलाई 2006 को मोदी ने एक भाषण में आतंकवाद निरोधक अधिनियम जैसे आतंकवाद विरोधी विधान लाने के खिलाफ उनकी नामंजूरी को लेकर भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचना की.

मुंबई की उपनगरीय रेलों में हुए बम विस्फोट हुआ था जिसके कारण उन्होंने केन्द्र सरकार से राज्यों को सख्त कानून लागु करने के लिए मांग की|

गुजरात में हुए दंगों के बारे में

नरेन्द्र मोदी का भाषण

27 फरवरी 2002 को अयोध्या से गुजरात वापस लौट कर आ रहे कारसेवकों को गोधरा स्टेशन पर खड़ी ट्रेन को मुसलमानों की खतरनाक भीड़ ने आग लगा कर जला दिया था जिसमे 59 कारसेवक मारे गए थे.

जिसके कारण पुरे गुजरात में हिन्दू मुस्लिम में दंगे भड़क चुके थे| जिसमे मरने वालों की संख्या करीब 1180 थी और अल्पसंख्यक लोग ज्यादा थे.

इस घट्ना पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी प्रशासन को दोषी ठहराया | और कांग्रेस और विपक्षी दलों ने नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहराया और इस्तीफे की मांग की|

मोदी ने गुजरात की दसवीं विधानसभा भंग होने पर अपना त्यागपत्र राज्यपाल को दे दिया और पुरे देश में राष्ट्रियपति को शासन करना पड़ा| दुबारा चुनाव हुए जिसमे भारतीय जनता पार्टी ने मोदी जी के नेत्रत्व में विधान सभा की कुल 182 सीटों में से 127 सीटों पर जीत हांसिल हुई.

2002 अप्रैल में भारत के उच्चतम न्यायलय ने विशेष जाँच भेजी ताकि पता चल सके की इसके पीछे मोदी का हाथ तो नहीं था.

ये जांच केवल दल दंगों में मारे गए कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी की शिकायत पर किया थे| “विशेष जाँच दल” (special investigation team) की रिपोर्ट पर ये पता चला की नरेंद्र मोदी ने कुछ भी नहीं किया.

उसके बाद 2011 फरवरी में टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने कहा की रिपोर्ट में कुछ बातें छुपाई गयी है और बिना सबूतों के मोदी को अपराध से छुटकारा नहीं मिल सकता.

इंडियन एक्सप्रेस का भी यही कहना था | और द हिन्दू में प्रकाशित रिपोर्ट में यह कहा गया है की मोदी ने ना केवल बहुत बड़े युद्ध को रोका बल्कि प्रतिक्रिया स्वरुप उठे गुजरात के दंगों में मुस्लिम उग्रवादियों के मारने को सही बताया है.

BJP ने मांग की विशेष जाँच दल (S.I.T.) की रिपोर्ट को लिक करके प्रकाशित करवाया गया और इसमें कांग्रेस का हाथ था और इसकी भी जांच उच्चतम न्यायलय द्वारा की जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद के ही एक मजिस्ट्रेट को इसकी जांच करने के लिए कहा | 2012 अप्रैल में फिर एक विशेष जांच के दल ने साबित किया की मोदी जी का दंगों में कोई प्रत्यक्ष हाथ नहीं है.

07 मई 2012 को उच्चतम न्यायलय द्वारा नियुक्त जज राजू रामचंद्रन ने रिपोर्ट में कहा है की गुजरात में हुए दंगों में यदि मोदी का हाथ है तो उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए (1)(क)व् (ख), 153 बी (1), 166 तथा 505 (2) के अंतर्गत सभी समुदायों के दुश्मनी की भावना फ़ैलाने के अपराध में दण्डित किया जा सकता है.

26 जुलाई 2012 को नई दुनिया के लेखक शाहिद सिद्दीकी ने मोदी का इंटरव्यू लिया जिसमे मोदी ने कहा की “जैसा की में पहले भी कह चूका हूँ की 2002 में हुए दंगों के पीछे मेरा कोई हाथ नहीं है| और उसके लिये में माफ़ी क्यूँ मांगू ? और यदि मेरी सरकार ने ऐसा किया है तो मुझे फांसी दे दो”

मुख्यमंत्री ने गुरूवार को नई दुनिया में कहा है की अगर मोदी गुनाहगार हैं तो उन्हें फांसी दे दो|

मोदी जी का कहना था की कब तक गुजरे जमाने को लिए बैठे रहोगे ? ये क्यूँ नहीं दिखाई देता कि पिछले एक दशक में गुजरात ने कितने तरक्की की है ? और इस तरक्की का फायदा तो मुस्लिम परिवार को भी हुआ है.

केन्द्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद से इस बात पर पूछा गया तो उन्होने कहा की “पिछले 12 वर्षों मैं एक बार भी गुजरात के मुख्यमंत्री के खिलाफ एफ़०आई०आर० (FIR) दर्ज नहीं हुई है तो आप उन्हें दोषी कैसे ठहरा सकते हो ? उन्हें कोन फांसी देने जा रहा है?

बाबरी मस्जिद के लिए 45 वर्षों से मुकदमा लड़ रहे मोहम्मद हाशिम अंसारी (92 वर्ष) का भी यही कहना है की नरेंद्र मोदी जी के प्रान्त गुजरात में मुस्लमान खुशहाल हैं और समृद्ध भी हैं | और कांग्रेस हमेशा ही मुस्लिमों में मोदी को ले कर भय पैदा करती है.

2014 सितम्बर में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी अबात ने कहा की मोदी जी को 2002 के दंगों के लिए दोषी नहीं ठहराना चाहिए क्यूंकि वो मात्र एक आधिकारी थे जो “अनगिनत जांच में पाक साफ़ साबित हुए हैं|”

लोकसभा चुनाव 2014 (प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार)

भाजपा कार्यसमिति द्वारा गोवा मैं नरेंद्र मोदी को 2014 को लोक सभा चुनाव अभियान की कमान सौंपी गयी थी| 13 सितम्बर 2013 को संसदीय बोर्ड की बैठक मैं लोकसभा के चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया.

उस समय बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी मौजूद नहीं थे तो पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने घोषणा की| और मोदी ने चुनाव अभियान की कमान राजनाथ सिंह को सोंप दी.

प्रधानमंत्री के पद का उम्मीदवार मोदी को बनाया गया और पहली रैली हरियाणा से रिवाड़ी शहर पहुंची | सांसद प्रत्याशी के रूप में उन्होंने देश की दो लोकसभा सीटों वाराणसी तथा वडोदरा से चुनाव लड़ा और निर्वाचन क्षेत्रों से विजयी भी हुए.

नरेंद्र मोदी का जीवन परिचय “लोक सभा चुनाव (2014) में मोदी की स्थिती”

समाचार चैनलों व समाचार पत्रों द्वारा किये गए सर्वेक्षणों में मोदी पहली पसंद थे जो की प्रधानमंत्री बनने के लिए सही भी थे| सितम्बर 2016 में निलसन होल्डिंग और इकोनोमिक्स टाइम्स के अनुसार 100 भरतीय कॉरपोरेट्स में से 74 कारपोरेट्स ने नरेंद्र मोदी तथा 7 ने राहुल गाँधी को बेहतर प्रधानमंत्री बताया.

एक इंटरव्यू के दौरान नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमृत्य सैन मोदी को बेहतर प्रधानमंत्री नहीं मानते हैं | इसके बावजूद जगदीश भगवती और अरविन्द पानगडिया को मोदी जी का अर्थशास्त्र अच्छा लगता है.

योग गुरु स्वामी रामदेव और कथावाचक मुरारी बापू ने नरेंद्र मोदी को सही कहा है.

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने पुरे भारत का भ्रमण किया | और तब 3 लाख किलोमीटर की यात्रा की |

पुरे देश में 437 बड़ी चुनावी रैलियों में, 3 डी सभाएं (चलचित्र) व चाय पर चर्चा आदि को मिलाकर कुल 5827 कार्यकर्म किये|

26 मार्च 2017 को चुनाव अभियान की शुरुआत माँ वैष्णो देवी के आशीर्वाद के साथ जम्मू से की और समापन मंगल पाण्डेय की जन्मभूमि बलिया में किया.

चुनाव का परिणाम:

राष्ट्रिय गठबंधन 336 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरा और भारतीय जनता ने उनमे से 282 सीटों की जीत हांसिल की और कांग्रेस ने कुल 44 सीटों पर सिमट कर रह गयी और उसके गठबंधन को केवल 15 सीटों से ही संतोष करना पड़ा.

नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाले ऐसे व्यक्ति हैं जो सन् 2001 से 2014 तक लगभग 13 साल गुजरात के 14 वें मुख्यमंत्री रहे ओर हिंदुस्तान के 15वे प्रधानमंत्री बने.

नेता प्रतिपक्ष चुनाव हेतु विपक्ष को एकजुट होना ही पड़ेगा क्योंकि किसी भी एक दल ने कुल लोकसभा सीटों के 10 प्रतिशत का आंकड़ा भी नहीं छुआ है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह

20 मई 2014 को संसद भवन में भारतीय जनता द्वारा आयोजित भाजपा संसदीय दल एवम सहयोगी दलों की एक संयुक्त बैठक में जब लोग आ रहे थे तब मोदी जी ने अन्दर पैर रखने से पहलें संसद भवन को जमीन से छु कर नमस्ते किया जैसे की मंदिर में घुसने से पहले लोग मंदिर की सिडीयों को छुते हैं.

संसद भवन में पहले कभी ऐसा किसी ने नहीं किया और ये सभी के लिये एक सिख है | उस बैठक में मोदी को न केवल भाजपा संसदीय दल अपितु एनडीए का भी नेता चुना गया.

राष्ट्रियपति ने नरेंद्र मोदी जी को भारत का 15वा प्रधानमंत्री नियुक्त करते हुए इसका विधिवत पत्र सौंपा | सोमवार 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली |

वडोदरा सीट से इस्तीफा क्यों दिया ?

नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक अंतर से जीती गुजरात के वड़ोदरा सीट को त्याग दिया और उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट का प्रतिनिधत्व करने का फैसला किया और घोषणा की कि गंगा की सेवा के साथ इस प्राचीन नगरी का विकास करेंगे.

प्रधानमंत्री के रूप में : (मोदी का शपथ ग्रहण समारोह)

नरेंद्र मोदी का 26 मई 2014 से भारत में 15वें प्रधानमंत्री का कार्यकाल राष्ट्रियपति भवन में आयोजित शपथ लेने के बाद शुरू हुआ | और मोदी जी के साथ 45 नेताओं ने भी गोपनीयता की शपथ ली.

मोदी जी के साथ 46 में से 36 ने हिंदी में शपथ ली और 10 ने अंग्रेजी में शपथ ली इस सामारोह में अलग अलग देशों के राजनीतिक पार्टियों के प्रमुख लोगों सहित सार्क देशों के राष्ट्रअध्यक्षों को भी बुलाया गया था.

सार्क देशों के मुख्य लोगों के नाम जो समारोह में थे |

  • आफ्गानिस्तान = हामिद करजई (राष्ट्रियपति)
  • बांग्लादेश =शिरीन शर्मिन (संसद की अध्यक्ष )
  • भूटान =शेरिंग तोबगे (प्रधानमंत्री )
  • मालदीव =अब्दुल्ला यामिन अब्दुल गयूम(राष्ट्रियपति)
  • मोरिशस =नवीनचंद्र रामगुलाम (प्रधानमंत्री)
  • नेपाल = सुशील कोइराला(प्रधानमंत्री)
  • पाकिस्तान = नवाज शरीफ (प्रधानमंत्री)
  • श्रीलंका =महिन्दा राजपक्षे (प्रधानमंत्री)

समारोह से सम्बन्धित मतभेद :

ऑल इण्डिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्ना द्रमुक) और राजग का घटक दल, मरुमचार्ली द्रविड़ मुनेत्र कझगम (MDMK) नेताओं ने नरेंद्र मोदी सरकार के श्रीलंकाई प्रधानमंत्री को बुलाने के फैसले को गलत बताया.

MDMK प्रमुख वाईको, मोदी से मिले और निमंत्रन का फैसला बदलवाने की कोशिश की, साथ में कांग्रेस नेता ने उनका विरोध किया | और साथ में श्रीलंका और पाकिस्तान ने भारतीय मछुवारों को रिहा किया | और मोदी ने आने वालों का स्वागत किया.

समारोह में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री को बुलाया गया था| और कर्णाटक के मुख्यमंत्री, सिधारर्मैया (कोंग्रेस) और केरल के मुख्यमंत्री, उम्मन चांदी (कोंग्रेस) ने आने से मना कर दिया.

तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी आने से मना कर दिया और प० बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने अपनी जगह मुकुल रॉय और अमित मिश्रा को भेजा.

वडोदरा में एक चाय बेचने वाला किरण महिदा, जिन्होंने मोदी की उम्मीदवारी प्रस्तावित की थी उनकों भी बुलाया गया था, और मोदी जी की माँ और अन्य तीन भाइयों ने ये कार्यकर्म टीवी पर लाइव देखा.

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपाय

  1. भ्रष्टाचार से समबन्धित स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT)
  2. योजना आयोग की समाप्ति की घोषणा की |
  3. प्रधानमंत्री जन धन योजना का आरम्भ |
  4. रक्षा उत्पादन क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति |
  5. 45% का कर देकर काला धन घोषित करना |
  6. सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिसों को हरी झंडी |
  7. रेल बजट प्रस्तुत नहीं किया जायेगा |
  8. काले धन को और अर्थव्यवस्था को सामान रुप से लाने के लिए 8 नवम्बर 2016 को 500 और 1000 के नोटों को बंद कर दिया |
नरेंद्र मादी की विदेशी नीति और नरेंद्र मोदी की शिक्षा

नरेंद्र मादी की विदेशी नीति और नरेंद्र मोदी की शिक्षा

  1. शपथग्रहण समारोह में सार्क देशों को बुलावा |
  2. भूटान की यात्रा सबसे पहले की |
  3. ब्रिक्स सम्मलेन में नए विकास बैंक की स्थापना |
  4. नेपाल यात्रा के समय पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा |
  5. अमेरिका और चीन से पहले जापान की यात्रा |
  6. पाकिस्तान को अन्तर्राष्ट्रीय जगत से अलग थलग करने में सफल |
  7. जुलाई 2017 इसराइल की यात्रा ,और नए सम्बन्ध बनाये |

कुछ नीतियाँ हैं जानने योग्य पढियेगा जरुर!

सुचना प्रौद्योगिकी = लेख : डिजिटल भारत (DIGITAL INDIA)
स्वस्थ्य और स्वच्छता = स्वच्छ भारत अभियान
रक्षा नीति = मोदी की सरकार ने रक्षा बलों को मजबूत करने के लिए सन् 2015 में रक्षा बजट 11% बढ़ा दिया और सितम्बर 2015 में उनकी सरकार ने समान रैंक समान पेंशन (वन रैंक वन पेंशन)की बहुत लम्बे समय से की जा रही मांग को स्वीकार कर लिया|

मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर भारत के नागा विद्रोहियों के साथ शान्ति समझौता किया 1950 से चला नागा समस्या का हल निकल सके.

  • 29 सितम्बर 2016 को नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक (अर्थ: बिना किसी को पता लगे अपना काम करके वापस आ जाना )
  • चीन की मनमानी का कडा विरोध और प्रतिकार|

घरेलू नीति:

  1. हजारों NGO का पंजीकरण रद्द करना |
  2. अलीगढ मुस्लिम विश्वविधालय को “अल्पसंख्यक विश्वविधालय” न मानना
  3. तिन बार तलाक कहकर तलाक देने को बंद कर दिया |
  4. जवाहर लाल नेहरु विश्विधालय दिल्ली में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोका |
  5. 70 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को सांसदों एवं विधायकों को मंत्रिपद न देने का कड़ा निर्णय |

आमलोगों से जुड़ने की पहल

“मन की बात” नामक कार्यकर्म से लोगों तक अपनी बातों को पहुचाना और लोगों की बातों को जानना उन्हें अपने द्वारा चलाई गयी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करना.

सम्मान और पुरस्कार

  1. 2014 में फ़ोर्ब्स पत्रिका में विश्व के शक्तिशाली व्यक्तियों में 14वा स्थान |
  2. 2015 में विश्व के शक्तिशाली लोगों में 9वा स्थान फ़ोर्ब्स पत्रिका के सर्वे में |
  3. 2016 में विश्व प्रसिद्ध फ़ोर्ब्स पत्रिका में विश्व का 9वा स्थान |
  4. अप्रैल 2016 में नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के उच्चतम नागरिक सम्मान “अब्दुलअजीज अल सउद के आदेश“ (The Order of Abdulaziz Al Saud)
  5. जून 2016 में अफगानिस्तान के राष्ट्रियपति अशरफ गानी ने भारतीय प्रधानमंत्री के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार अमीर अमानुल्ला खान अवार्ड से सम्मानित किया |

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