कविताएँ

Rabindranath Tagore Poems in Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर की 11 कविताएँ

Rabindranath Tagore Poems in Hindi
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प्रिय छात्रों, आज हम आपके लिए रबिन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कवितायेँ (Rabindranath Tagore Poems in Hindi) लेकर आयें हैं| यकीन मानिए रबिन्द्रनाथ टैगोर की कवितायेँ पढने के बाद आपको बहुत आनंद आयेगा और आपका मन हर्ष और उल्लास से भर जायेगा.

कवी रबिन्द्रनाथ टैगोर की कवितायेँ देश विदेश में मशहूर हैं और रबिन्द्रनाथ टैगोर की चर्चा चारों दिशा में है| रबिन्द्रनाथ टैगोर का गान जो की भारत का राष्ट्र-गान “जन गण मन” और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान “आमार सोनार बाँग्ला” गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं.

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविताओं के साथ साथ रबिन्द्रनाथ टैगोर के बारे में

कोलकाता में एक अमीर बंगाली परिवार में रबिन्द्रनाथ टैगोर का जन्म हुआ| रबिन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई सन् 1861 को में हुआ था.

रबिन्द्रनाथ टैगोर के पिता का नाम देवेंद्रनाथ टैगोर और रबिन्द्रनाथ टैगोर की माता का नाम शारदा देवी था.

रबिन्द्रनाथ टैगोर को प्रकृति से बहुत लगाव था| रबीन्द्रनाथ टैगोर का मानना था कि विद्यार्थियों को प्राकृतिक माहौल में हीं पढ़ाई करनी चाहिए.

सन् 1883 में मृणालिनी देवी के साथ उनका विवाह सम्पन्न हुआ| रबीन्द्रनाथ टैगोर की पहली कविता 8 साल की छोटी आयु में हीं लिख दी थी| रबीन्द्रनाथ टैगोर की मृत्यु 7 अगस्त 1941 को हुई थी| इस दिन महान व्यक्तित्व इस संसार को छोड़कर चला गया.

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रबिन्द्रनाथ टैगोर जी को गुरुदेव जी के नाम से भी जाना जाता है रबिन्द्रनाथ टैगोर की मशहूर कवितायेँ निम्नलिखित है:

जीवन परिचय : रबिन्द्रनाथ टैगोर की जीवनी, शिक्षा, रचनाएँ, उपलब्धियां और उनकी मृत्यु की जानकारी

Rabindranath Tagore Poems in Hindi – रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता

(मेरा शीश नवा दो – गीतांजलि (काव्य)

मेरा शीश नवा दो अपनी, चरण-धूल के तल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब, मेरे आँसू-जल में।
अपने को गौरव देने को, अपमानित करता अपने को,
घेर स्वयं को घूम-घूम कर, मरता हूं पल-पल में।

देव! डुबा दो अहंकार सब, मेरे आँसू-जल में।
अपने कामों में न करूं मैं, आत्म-प्रचार प्रभो;
अपनी ही इच्छा मेरे, जीवन में पूर्ण करो।

मुझको अपनी चरम शांति दो, प्राणों में वह परम कांति हो.
आप खड़े हो मुझे ओट दें, हृदय-कमल के दल में।
देव! डुबा दो अहंकार सब, मेरे आँसू-जल में।

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Rabindranath Tagore Poems in Hindi – (होंगे कामयाब)

होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हम चलेंगे साथ-साथ, डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ, एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन।

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Best Famous Rabindranath Tagore Poems in Hindi

तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो तू चल अकेला,
चल अकेला, चल अकेला, चल तू अकेला!
तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो चल तू अकेला,
जब सबके मुंह पे पाश..
ओरे ओरे ओ अभागी! सबके मुंह पे पाश,
हर कोई मुंह मोड़के बैठे, हर कोई डर जाय!
तब भी तू दिल खोलके, अरे! जोश में आकर,
मनका गाना गूंज तू अकेला!
जब हर कोई वापस जाय..
ओरे ओरे ओ अभागी! हर कोई बापस जाय..
कानन-कूचकी बेला पर सब कोने में छिप जाय…

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Rabindranath Tagore Poems in Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर की कहानियाँ

(विपदाओं से रक्षा करो- यह न मेरी प्रार्थना)

विपदाओं से रक्षा करो – यह न मेरी प्रार्थना,
यह करो : विपद् में न हो भय।
दुख से व्यथित मन को मेरे
भले न हो सांत्वना,
यह करो : दुख पर मिले विजय।
मिल सके न यदि सहारा,
अपना बल न करे किनारा;-
क्षति ही क्षति मिले जगत् में
मिले केवल वंचना,
मन में जगत् में न लगे क्षय।
करो तुम्हीं त्राण मेरा-
यह न मेरी प्रार्थना,
तरण शक्ति रहे अनामय।
भार भले कम न करो,
भले न दो सांत्वना,
यह करो : ढो सकूँ भार-वय।
सिर नवाकर झेलूँगा सुख,
पहचानूँगा तुम्हारा मुख,
मगर दुख-निशा में सारा
जग करे जब वंचना,
यह करो : तुममें न हो संशय।

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Rabindranath Tagore Poems in Hindi on India

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविता (नहीं मांगता)

नहीं मांगता, प्रभु, विपत्ति से, मुझे बचाओ, त्राण करो
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं, इतना, हे भगवान, करो।
नहीं मांगता दुःख हटाओ, व्यथित ह्रदय का ताप मिटाओ
दुखों को मैं आप जीत लूँ,ऐसी शक्ति प्रदान करो

विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,इतना, हे भगवान,करो।
कोई जब न मदद को आये मेरी हिम्मत टूट न जाये।
जग जब धोखे पर धोखा दे और चोट पर चोट लगाये –
अपने मन में हार न मानूं,ऐसा, नाथ, विधान करो।

विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,इतना, हे भगवान,करो।
नहीं माँगता हूँ, प्रभु, मेरी जीवन नैया पार करो
पार उतर जाऊँ अपने बलइतना, हे करतार, करो।
नहीं मांगता हाथ बटाओ मेरे सिर का बोझ घटाओ

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आप बोझ अपना संभाल लूँ ऐसा बल-संचार करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,इतना, हे भगवान,करो।
सुख के दिन में शीश नवाकर,तुमको आराधूँ, करूणाकर।
औ’ विपत्ति के अन्धकार में,जगत हँसे जब मुझे रुलाकर

तुम पर करने लगूँ न संशय,यह विनती स्वीकार करो।
विपदा में निर्भीक रहूँ मैं,इतना, हे भगवान, करो।

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Rabindranath Tagore Poems in Hindi on Nature

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविता (प्रेम में प्राण में गान में गंध में)

प्रेम में प्राण में गान में गंध में
आलोक और पुलक में हो रह प्लावित
निखिल द्युलोक और भूलोक में
तुम्हारा अमल निर्मल अमृत बरस रहा झर-झर।

दिक-दिगंत के टूट गए आज सारे बंध
मूर्तिमान हो उठा, जाग्रत आनंद
जीवन हुआ प्राणवान, अमृत में छक कर।

कल्याण रस सरवर में चेतना मेरी
शतदल सम खिल उठी परम हर्ष से
सारा मधु अपना उसके चरणॊं में रख कर।

नीरव आलोक में, जागा हृदयांगन में,
उदारमना उषा की उदित अरुण कांति में,
अलस पड़े कोंपल का आँचल ढला, सरक कर।

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Famous Poems of Rabindranath Tagore in Hindi

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविता (मन जहां डर से परे है)

“मन जहां डर से परे है और सिर जहां ऊंचा है;
ज्ञान जहां मुक्त है और जहां दुनिया को
संकीर्ण घरेलू दीवारों से छोटे छोटे टुकड़ों में बांटा नहीं गया है;
जहां शब्द सच की गहराइयों से निकलते हैं, जहां थकी हुई प्रयासरत बांहें

त्रुटि हीनता की तलाश में हैं, जहां कारण की स्पष्ट धारा है
जो सुनसान रेतीले मृत आदत के,वीराने में अपना रास्ता खो नहीं चुकी है;
जहां मन हमेशा व्यापक होते विचार और सक्रियता में, तुम्हारे जरिए आगे चलता है
और आजादी के स्वर्ग में पहुंच जाता है,ओ पिता परमेश्वर
मेरे देश को जागृत बनाओ”

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Rabindranath Tagore Poems in Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर की कवितायेँ

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविता (विविध वासनाएँ)

विविध वासनाएँ हैं मेरी प्रिय प्राणों से भी
वंचित कर उनसे तुमने की है रक्षा मेरी;
संचित कृपा कठोर तुम्हारी है मम जीवन में।

अनचाहे ही दान दिए हैं तुमने जो मुझको,
आसमान, आलोक, प्राण-तन- मन इतने सारे,
बना रहे हो मुझे योग्य उस महादान के ही,
अति इच्छाओं के संकट से त्राण दिला करके।

मैं तो कभी भूल जाता हूँ, पुनः कभी चलता,
लक्ष्य तुम्हारे पथ का धारण करके अन्तस् में,
निष्ठुर ! तुम मेरे सम्मुख हो हट जाया करते।

यह जो दया तुम्हारी है, वह जान रहा हूँ मैं;
मुझे फिराया करते हो अपना लेने को ही।
कर डालोगे इस जीवन को मिलन-योग्य अपने,
रक्षा कर मेरी अपूर्ण इच्छा के संकट से।।

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Poems by Tagore in Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर की कवितायेँ

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविता (चुप-चुप रहना सखी)

चुप-चुप रहना सखी, चुप-चुप ही रहना,
कांटा वो प्रेम का,छाती में बाँध उसे रखना.
तुमको है मिली सुधा, मिटी नहीं अब तक उसकी क्षूधा,
भर दोगी उसमे क्या विष ! जलन अरे जिसकी सब बेधेगी मर्म,
उसे खिंच बाहर क्यों रखना !!

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Patriotic Poems By Rabindranath Tagore in Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर की कवितायेँ

अनसुनी करके तेरी बात
न दे जो कोई तेरा साथ
तो तुही कसकर अपनी कमर
अकेला बढ़ चल आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

देखकर तुझे मिलन की बेर
सभी जो लें अपने मुख फेर
न दो बातें भी कोई क रे
सभय हो तेरे आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

तो अकेला ही तू जी खोल
सुरीले मन मुरली के बोल
अकेला गा, अकेला सुन ।
अरे ओ पथिक अभागे रे
अकेला ही चल आगे रे ।

जायँ जो तुझे अकेला छोड़
न देखें मुड़कर तेरी ओर
बोझ ले अपना जब बढ़ चले
गहन पथ में तू आगे रे–
अरे ओ पथिक अभागे रे ।

रबिन्द्रनाथ टैगोर

Famous Rabindranath Tagore Poems in Hindi – रबिन्द्रनाथ टैगोर पर हिंदी कविता

दिन पर दिन चले गए, पंथ के किनारे
गीतों पर गीत, अरे रहता पसरे||
बीतती नहीं बेला, सुर में उठाता |
जोड़-जोड़ सपनों से उनको मैं गाता ||
दिन पर दिन जाते में बैठा एकाकी |
जोह रहा बाट, अभी मिलना तो बाकी ||
चाहो क्या, रुकूँ नहीं, रहूँ सदा गाता |
करता जको प्रीत, अरे, व्यथा वही पाता||

रबिन्द्रनाथ टैगोर

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