भाई दूज

भैया दूज की कहानी – Bhai Dooj Katha Story in Hindi

भैया दूज की कहानी और कथा हिंदी में

आज मै आपके लिए बहुत ही रोचक कहानी लेकर आया हूँ| जी हाँ आज हम बात कर रहे है भैया दूज की कहानी की|

भैया दूज के बारे में जानने से पहले धनतेरस और दीपावली आती है| धनतेरस का त्यौहार भगवान धन्वतरि की पूजा करने के लिए मनाया जाता है| धनतेरस के दिन लोग नए नए बर्तन, वाहन आदि खरीदते हैं.

धनतेरस के बाद आती है छोटी दीपावली, छोटी दीपावली के बारे में सभी जानते ही है| छोटी दीपावली के दिन लोग घरों को साफ करते हैं ताकि बड़ी दीपावली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी जी का स्वागत भी किया जा सके| दीपावली की कहानी तो आप जानते ही हैं.

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दीपावली के अगले दिन विषकरमा पूजा की जाती है| इस दिन भगवान विशकरमा जी की पूजा के उपलक्ष में लोग सभी अपने औजारों की, मशीनों, वाहनों की पूजा करते है| कहा जाता है की इस दिन लोग मशीनों, औजारों को हाथ भी नहीं लगाते है उनके हिसाब से मशीनों को आरामर करने का दिन माना जाता है.

भैया दूज की कहानी सुनाने से पहले मै आपको भैया दूज का महत्व बताना चाहता हूँ| भाई दूज की कहानी से पहले हमें ये जानना है की भैया दूजा क्या होता है, भाई दूज क्यों मनाते हैं और भाई दूज क्यों मनाया जाता है ?

भैया दूज का त्यौहार हिन्दू धर्म में मनाया जाता है| भैया दूज जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है| भैया दूज में बहाने भाई की लंबी आयु की प्राथना करती है| भाई दूज का त्यौहार दीपावली से दूसरे दिन आता है.

भैया दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है| भैया दूज का त्यौहार भाई बहन के प्यार व एक दूसरे के प्रति स्नेह को दर्शाता है.

भैया दूज के दिन बेरी पूजा नामक पूजा भी की जाती है| कहा जाता है की भैया दूज के दिन भाइयों को बहनो के यहाँ नहाना चाहिए| भैया दूज पर बहने भाइयों को तेल मलकर गंगा यमुना में स्नान करती है.

बहने इस दिन अपने भाइयों को अपने हाथों से खाना खिलाये तो उससे उनके भाइयों की उम्र बढ़ती है| हो सके तो बहने अपने भाइयों को चावल खिलाये तो इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है.

चचेरी या ममेरी कोई भी बहन हो सकती है। यदि कोई बहन न हो तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठ कर भोजन कर लेना भी शुभ माना जाता है.

इस दिन गोधन कूटने की प्रथा भी है| गोबर की मानव मूर्ति बना कर छाती पर ईंट रखकर स्त्रियां उसे मूसलों से तोड़ती हैं| स्त्रियां घर-घर जाकर चना, गूम तथा भटकैया चराव कर जिव्हा को भटकैया के कांटे से दागती भी हैं.

दोपहर के समय यह सब करके बहन भाई पूजा विधान से इस पर्व को प्रसन्नता से मनाते हैं। इस दिन यमराज तथा यमुना जी के पूजन का विशेष महत्व होता है.

भैया दूज की कहानी – भाई दूज की कथा कहानी हिंदी में

भैया दूज क्यों मनाया जाता है ? भैया दूज मनाने के पीछे की कहानी निम्नलिखित है|

भैया दूज की कथा : भगवान श्री सूर्यदेव जी की पत्नी छाया थीं| छाया माता और सूर्यदेव से यमराज और यमुना माता का जन्म हुआ था| यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी.

यमुना जी हमेशा से ही यमराज से निवेदन करती थी की आप अपने प्रिय मित्रों सहित मेरे घर आओ और भोजन ग्रहण करो| लेकिन यमराज कभी उनकी बात नहीं सुनते थे.

कार्तिक शुक्ला का दिन आया| इस उपलक्ष में यमुना ने यमराज को निमंत्रण दिया और उस दिन यमराज को अपने जीएचआर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया था.

यमुना का प्रेम देख कर यमुना के बार बार बुलाने के कारण यमराज ने यमुना की बात मान ली| यमराज ने यमुना से कहा की बहन कोई भी मुझे अपने यहाँ नहीं बुलाना चाहता| लेकिन तुम मुझे हमेशा अपने यहाँ बुलाती रहती हो|

यमराज ने अपनी बहन की सद्भावना को समझा और सोचा की मुझे अपनी बहन के निवेदन का पालन करना चाहिए.

बहन के बुलाने पर यमराज यमुना जी के यहाँ जाने लगे| उस खुशी में यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया|

यमराज को अपने घर आया हुआ देख यमुना जी का खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा| यमुना जी ने यमराज का स्नान कर पूजा करने के बाद अपने भाई को खाना खिलाया.

यमुना के इस व्यवहार से प्रसन्न होकर यमराज ने कहा बहन में तुम्हारे प्रेम को देख कर बहुत खुश हुआ हूँ| तुम्हें जो चाहिए मै तुम्हें दूंगा मेरा वचन है तुमसे| मांगो तुम्हें जो मांगना है.

यमुना जी ने यमराज से कहा की मुझे धन दौलत अन्य कुछ भी नहीं चाहिए| बस आप मेरे यहाँ इस दिन प्रत्येक वर्ष आते रहिए मेरे लिए यही काफी है| मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे,, उसे तुम्हारा भय न रहे|

यमराज ने तथास्तु कहा और यमुना को अमूल्य वस्त्र आभूषण आदि देकर आयमलोक को वापस चले गए|

इसी दिन से भैया दूज की पूजा करने का त्यौहार शुरू हुआ| प्रत्येक वर्ष जो बहन अपने भाई की लंबी आयु चाहती है वो इस दिन यमुना जी की तरह पूजा करती है.

भैया दूज की कहानी – Bhai Dooj Story in Hindi

एक बार की बात है एक बूढ़ी औरत जिसके सात पुत्र एक पुत्री थी| उस बूढ़ी औरत के सातों बेटों पर सर्प की कुदृष्टि थी| जैसे ही उसके किसी भी बेटे की शादी होती उसका सातवाँ फेरा होता तो सर्प उसे डंस लेता और वो मृत्यु को प्राप्त हो जाता था.

वो बूढ़ी औरत दुखी हो गयी थी| बेटी की शादी पहली की जा चुकी थी| इसी तरह छ: बेटों की मृत्यु हो गयी थी उस बूढ़ी औरत पर बहुत बुरा समय आ गया था| जिसकी वजह से उसने सातवे की शादी करने के लिए मना कर दिया था| छ: बेटों के मरने के दुख में बूढ़ी औरत अंधी हो गयी थी.

लेकिन कभी न कभी तो उसकी शादी भी करनी पड़ती ही| बूढ़ी औरत किसी भी तरह जोखिम नहीं उठा सकती थी.

भाई दूज का समय आ गया था| सातवें बेटे ने कहा माँ में दीदी के घर जाने वाला हूँ भाई दूज आ गया है| माँ ने कहा है ध्यान से जा और जल्दी आ|

भाई के आने की खुशी में बहन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा| भाई की खातिरदारी के लिए अच्छा पकवान बनाने के लिए बहन ने सोचा की पड़ोसन की मदद लेनी पड़ेगी|

खुशी में बहन ने पड़ोसन से मदद मांगी और पूछा दीदी मीरा भाई आ रहा है मैं क्या करूँ? उसे क्या बना के खिलाऊँ ?

पड़ोसन उससे चिड़ती थी उसने कहा की “दूध से रसोई लेप, और घी से चावल पका|” अब भाई की खुशी में पागल बहन ने सोचा की हाँ ऐसा ही करूंगी|

भाई को आते रास्ते में साँप मिला| साँप उसे काटने को आगे बड़ा तो उसने बोला की भाई आपका मैंने क्या बिगाड़ा है मुझे क्यों काटना चाहते हो ?

साँप ने कहा की मै तुम्हारा काल हूँ और तुम्हें यमराज के पास पहुँचाने के लिए आया हूँ|

भाई ने रोते हुए कहा की भैया आप मुझे मत काटो मेरी बहन मेरा इंतजार कर रही है| मैं ही उसका आखिरी भाई हूँ उसका और कोई भी भाई नहीं बचा है| अगर मैं उसके पास नहीं गया और उसे पता चला की मैं भी मर गया हूँ| तो वो भी मर जाएगी.

सांतवे भाई के रोने से साँप ने कहा की तुझे क्या लगता की तू मुझे बेवकूफ बना के चला जाएगा|

लड़के ने कहा की तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है| तो तुम मेरे झोले में बैठ जाओ जब मेरी बहन भैया दूज बना ले उसके बाद तुम मुझे मार देना|

भाई बहन के घर पहुंचा| भाई को देखकर बहन की आँखों से आँसू निकल आए| भाई ने बहन से बोला दीदी भूख लग रही है खाना दो जल्दी|

बहन ने पड़ोसन के कहने पर रसोई को दूध से धोया था और घी में चावल पकाने की कोशिश की थी|

भाई ने पूछा की क्या हुआ दीदी इतना समय क्यों लग रहा है| दीदी ने सारी बात बताई की पड़ोसन ने मुझे ऐसे ऐसे करने को कहा|

भाई ने हंसते हुए कहा की दीदी कहीं सुना है आपने की दूध से कभी रसोई लिपि गयी हो और घी में कभी चावल पके है| गोबर से रसोई लीपों और दूध में चावल पकाओ|

खाना खाने के बाद भाई को नींद आने लगी और वो सोने लगा| इतने में बहन के बच्चे आ गए और उन्होने मामा मामा कह कर बोला की मामा हमरे लिए क्या लेकर आए|

तब उसने कहा बेटा मै कुछ नहीं लाया लूँ| मना करने के बावजूद भी बच्चों ने उस थेले को उठा लिया जिसमे साँप था और खोल कर देखने लगे| लेकिन उसमे बच्चों को हीरे का हार मिला|

दीदी ने बोला की तू ये मेरे लिए लेकर आया है| भाई ने बोला की तुम्हें अच्छा लगा तो तुम रख लो|

अगले दिन भाई ने बहन से अपने घर जाने की इजाजत मांगी| बहन ने अपने भाई के लिए लड्डू बना के रखे थे| बहन ने लड्डू भाई को दिये|

भाई ने बहन से अलविदा लिया और आगे चल दिया| थोड़ी दूर जा कर थक कर एक पेड़ के नीचे सोने लगा|

इधर बहन के बच्चों ने कहा माँ खाना दे दो भूख लगी है| उनकी माँ ने कहा की अभी खाना नहीं बना है समय लगेगा तब बच्चों ने कहा जो मामा को लड्डू दिये थे हमें भी दे दो हम खा लेंगे|

माँ ने कहा जाओ चक्की पर रखे है बचे हुए लड्डू जा कर खा लो| बच्चों ने जा कर देखा तो पता चला की वहाँ सांप की हड्डियाँ पड़ी है|

अब बहन की हालत खाराब हो गयी और वो बाहर की तरफ भागी, लोगों से पूछने पर पता चला की एक पेड़ के नीचे एक व्यक्ति सो रहा था|

बहन को लगा की वही उसका भाई है| वो भागती हुई गयी उसके पास और उसे उठाने लगी| उसने भाई को उठाया और पूछा कहीं तूने लड्डू तो नहीं खाये|

भाई ने कहा क्या दीदी क्या हुआ| ये रहे तुम्हारे लड्डू नहीं खाये मैंने|

बहन को लगा की कुछ अच्छा नही हो रहा है| उसने बोला की मैं भी अब तेरे साथ घर चलूँगी तुझे अकेले नहीं छोड़ूँगी|

भाई ने बोला की तुम्हारी मर्जी| चलते हुए बहन को प्यास लगी, भाई से बोला की मुझे प्यास लगी है पानी पीना है|

भाई ने चारों तरफ नजर फैलाई और एक तरफ चील ऊढ़ रही थी| बहन ने बोला की तू यहीं रुक मै अभी आ रही हूँ|

बहन पानी पी कर आ रही थी की उसने देखा की एक जगह जमीन में 6 शिलाएँ गढ़ी हैं और एक बिना गढ़ी हुई रखी है| बहन ने वहाँ से गुजर रही एक बुढ़िया से पूछा की ये सब क्या है|

उस बुढ़िया ने बताया की किसी एक औरत के सात बेटे है जिनमे छ: की शादी के समय साँप काटने से मृत्यु हो गयी थी| अब जब सातवें की शादी होगी तब ये आखिरी शीला भी बाकियों की तरह जमीन में गढ जाएगी|

बहन ने जब ये सुना तो उसके होश ऊढ़ गए| वो समझ गयी थी की ये सब उसके भाइयों के लिए किया गया है| बहन ने उस बूढ़ी औरत से पूछा की मैं क्या करूँ कुछ बताओ| बूढ़ी औरत ने उसे सब बता दिया की वो अपने भाई की जान कैसे बचा सकती है|

भाई की जान बचाने के लिए बहन कुछ भी करने को तैयार हो गयी| बूढ़ी औरत के कहने पर बहन ने अपने बालों को खोल लिया और अपने भाई के पास गयी और ज़ोर ज़ोर से बोलने लगी “तू तो जलेगा, कटेगा, मरेगा|

भाई ने बहन की ये हालत देख कर सोचा की दीदी को ये क्या हो गया है ? दीदी तो पानी पीने गयी थी लगता है की कोई चुड़ैल दीदी पर आ गयी है|

किसी तरह भाई अपनी दीदी को लेकर अपनी माँ के पास आया और माँ को सब बताया| कुछ समय बाद भाई की सगाई का समय आ गया था| बूढ़ी माँ ने सातवे बेटे की शादी की मंजूरी दे दी थी|

भाई को जब सेहरा पहनने की बारी आई तो बहन ने कहा की ये नहीं सेहरा में पहनुंगी ये तो जलेगा मरेगा, कुटेगा|

सेहरे में साँप था| बहन ने उस साँप को निकाल दिया इसी तरह साँप ने बहुत कोशीश की और बहन ने अपने भाई की रक्षा की|

हार कर साँपों का राजा खुद आया, गले की वरमाला में छुप कर लेकिन बहन ने उस साँप को एक लौटे में एक थाली से टंक कर बंद कर दिया|

अब ये देखती हुई, साँप की पत्नी वहाँ आ गयी और बोलने लगी की मेरे पति का दम घुट रहा है| उसे छोड़ दो लेकिन बहन ने कहा की तेरे पति को छोड़ देंगे पहले तू मेरे भाई से अपनी कुदृष्टि हटा और अपने रास्ते जा|

नागिन ने ऐसा ही किया| बहन के इशारे पर नयी दुल्हन ने कहा की में तेरे पति को छोड़ दूँगी पहले मुझे मेरे एक जेठ को छोड़ कोई तो होना चाहिए घर में जिससे में लड़ा करूँ| ऐसे ही बहाने बना कर नयी दुल्हन ने सभी छ: जेठों को छुड़ा लिया|

उधर रो रो कर भूड़ी माँ का हाल बुरा था| बुढ़िया को लग रहा था की अब उसका सातवा बेटा भी नहीं रहेगा|

किसी ने बताया की आपके सभी बेटे और बहुएँ आ रही है| अब माँ की आँखों से आँसू आने लगे और खुशी में भगवान से कहा की अगर ये सच है तो मेरी आँखें ठीक हो जाए और मेरे सिने से दूध की धार बहने लगे|

बूढ़ी औरत के साथ ऐसा ही हुआ जैसा उसने भगवान से बोला था| अपने बच्चों को देख कर वो बहुत खुश हुई|

बूढ़ी औरत को अपनी बेटी की शक्ति और बेटी का अपने भाइयों से प्यार देख कर उसके आँसू आ गए|

सभी अपनी बहन को ढूँढने लगे लेकिन देखा की वो तो भूसे की कोठरी में सो रही थी| उठने के बाद वो अपने घर को चली फिर उसके साथ लक्ष्मी माँ भी जाने लगी|

बूढ़ी माँ ने कहा की बेटी पीछे मूढ़ कर देख क्या सारी लक्ष्मी अपने साथ ही ले जाएगी|

बहन ने पीछे मूड कर देखा और हँसते हुए कहा “जो भी कुछ माँ ने अपने हाथों से दिया वह मेरे साथ चल और बाकी बचा हुआ मेरे भाई भाभी के साथ रुक जाए|”

बहन ने अपने भाई भाभी की जिंदगी संवार दी|

दोस्तों देखा एक बहन के प्यार ने अपने भाइयों की ज़िदगी सवार दी| भैया दूज के दिन की कथा सभी बहनों भाइयों को सुननी चाहिए|

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धनतेरस पर लेख ⇓

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