हनुमान जयंती

हनुमान जयंती 2018 – पूजा विधि, मंत्र, महत्व और कहानी

हनुमान जयंती - पूजा विधि, मंत्र, महत्व और कहानी

हिन्दू धर्म में हनुमान जी का बहुत बड़ा महत्व है, हनुमान जी की मान्यता इतनी हैं की हनुमान जी के जन्मदिन (हनुमान जयंती) पर हर हनुमान मंदिर में भक्तों का बहुत बड़ा गुट जम्मा होता है.

भक्तजन हनुमान मंदिरों में सुबह 4:00 बजे से ही जा कर लाइन लगा लेते हैं| कोई कोई तो हनुमान जयंती के दिन मेहंदीपुर बालाजी जाना पसंद करते हैं| जगह जगह भंडारे होते है.

भारतीय हिंदी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार हर साल चैत्र (चैत्र पूर्णिमा) माह के शुक्ल पक्ष में 15वें दिन मनाया जाता है.

हनुमान जयंती – Birthday of Hanuman Ji in Hindi

हनुमान जी को तो हर हिन्दू जानता ही है मगर भारत में तो हर व्यक्ति जानता है|

हनुमान जयंती कब है ?

इस साल हनुमान जयंती 31 मार्च दिन शनिवार को मनाई जाएगी|

हनुमान जी कौन है ? हनुमान जी के माता पिता का नाम क्या है?

हनुमान जी की माता अंजनी देवी और पिता महाराज केसरी के पुत्र हैं| इन्हे पवन पुत्र भी कहा जाता है| हनुमान जी के कई नाम है जिन्हें हनुमान भक्तों द्वारा बोला जाता है.

हनुमान जी के नाम हिंदी में

हनुमान जी के नाम तो बहुत से हैं मगर जो ज्यादा प्रसिद्ध है वो इस प्रकार है:-

  1. अंजनी पुत्र
  2. केसरी नंदन
  3. बजरंग बली
  4. मारुति
  5. शंकर सुवन
  6. संकटमोचन
  7. महावीर
  8. रामदूत आदि कई नाम है|

हनुमान जयंती को कब और कैसे मानते है?

भगवान हनुमान जी प्रभु श्री राम के बहुत बड़े भक्त हैं| राम जी को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, हनुमान जी के जन्मदिन का बेसवरी के साथ इन्तजार किया जाता है| इस दिन लोग मंदिरों में जाते हैं, पूजा करते हैं, प्रसाद बाँटते हैं.

हनुमान जी के जन्मदिन पर लोग बड़ी दूर दूर से मंदिरों में आते हैं, हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे उनका जीवन बहुत ही शरारतों से भरा हुआ था| हनुमान जी को पवनदेव, शंकर भगवान, विष्णु, ब्रह्मा जी द्वारा वरदान मिला था, उन्हें कई तरह की शक्तियाँ मिली थी.

हालाँकि हनुमान जी भगवान शिव के ही रूप हैं जो की भगवान श्री राम की मदद के लिए और इस दुनिया का कल्याण करने के लिए इस धरती पर आये हैं.

हनुमान जी सब का कल्याण करते हैं| हनुमान जी का अस्तित्व आज भी हैं आज भी भगवान हनुमान जीवित है उनको महसूस किया जा सकता है.

महाराष्ट्र में, यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने की पूर्णिमा को मनाया जाती है। यद्यपि, अन्य हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह अश्विन माह के अंधेरे पक्ष में 14वें दिन पड़ती है| पूजा के बाद, पूरा आशीर्वाद पाने के लिए लोगों में प्रसाद बाँटा जाता है.

अन्य राज्यों में भी हनुमान जी का जन्मदिन बड़े धूम धाम के साथ मनाया जाता है जैसे की तमिलानाडु और केरल में, यह मार्गशीर्ष माह (दिसम्बर और जनवरी के बीच में) में, इस विश्वास के साथ मनाई जाती है कि, भगवान हनुमान इस महीने की अमावश्या को पैदा हुए थे.

उड़ीसा में, यह वैशाख (अप्रैल) महीने के पहले दिन मनाई जाती है।

कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में यह वैशाख महीने के 10वें दिन मनाई जाती है, जो चैत्र पूर्णिमा से शुरु होती है और वैशाख महीने के 10वें दिन कृष्ण पक्ष पर खत्म होती है.

हनुमान जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त – Hanuman Jayanti 2018 in Hindi

जन्मदिन 31 मार्च 2018 को है लेकिन पूजा समय 30 मार्च 2018 को शाम 7:30:33 से 31 मार्च 2018 शाम 6:10:45 तक रहेगी | विद्वानों शास्त्रों के अनुसार एसा माना जाता है की हनुमान जी के जन्मदिन के अवसर पर रात को हनुमान जी की पूजा करने से हनुमान जी की असीम कृपा बरसती है.

हनुमान जयंती की पूजा विधि – Hanuman Jayanti Puja Vidhi in Hindi

हनुमान जी के जन्मदिन पर उन्हें घी में सिंदूर मिलाकर लेप लगया जाता है| हनुमान जी के भक्त पर शनि और राहू के दोष कभी भी दोषित नहीं करते हैं.

जो भी सामग्री पूजा में लगेगी हम उसे नीचे लिख देते हैं, पूरी सामग्री को पूजाघर में इकट्ठा कर लें और फिर एक चौकी पर लाल कपडा बिछा लें चौकी न हो तो भी आप कोई लकड़ी का पटरा रख सकते है, चौकी पर हनुमान जी की फोटो या मूर्ति रख सकते हैं.

दिया और धुपबत्ती जलाएं साथ में ये न भूलें की पहले गणेश जी की पूजा भी अवश्यक है| गणेश जी का नाम सबसे पहले लिया जाता है और गणेश जी को सभी भगवान में सबसे श्रेठ माना जाता है.

साथ में गणेश जी का भी दिया जलाएं, दीपक जला कर हनुमान चालिसा और सुन्दरकांड का पाठ करें और हनुमान जी की आरती करना न भूलें| हनुमान जी की पूजा करें प्रार्थना करें और अपनी मनोकामना मांग लें एवम हनुमान जी को प्रसाद का भोग लगायें.

प्रसाद में बूंदीचूर के लड्डू और बूंदी और अपनी इच्छा अनुसार भोग लगायें, हनुमान जी की पूजा करना बड़ा ही पुन्य का काम है मन लगा के पूजा कीजिये बस दिल में श्रद्धा होनी चाहिए, हनुमान जी के नाम लेने से ही दुःख दर्द खतम हो जाते हैं.

हनुमान मंत्र हिंदी में – Lord Hanuman Mantra in Hindi

मनोजवं मारुततुल्यवेगम्
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्री रामदूतं शरणं प्रपद्ये।।

हनुमान जयंती 2018 पूजा सामग्री | पूजा की सभी सामग्री

एक चौकी, एक लाल कपड़ा, भगवान राम जी की मूर्ति माता सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ, एक कप चावल बिना टूटे हुए, तुलसी जी के कुछ पत्ते, एक धुपबत्ती का पैकेट, घी से भरा एक दिया, ताजे फूल, चन्दन या रोली, गंगाजल, और थोडा गुड और चना.

हनुमान जयंती मनाने का महत्व

भगवान हनुमान जी वानर समुदाय से थे, हिन्दू समुदाय उन्हें अपना भगवान मनाता है हनुमान जी में एक विचित्र प्रकार की शक्ति है उनके अन्दर कई हजार गुना हाथियों की शक्ति है, जिस कारण पहलवान, बलवान लोग… भगवान हनुमान को बहुत मानते है.

हनुमान अवतार को महान शक्ति, आस्था, भक्ति, ताकत, ज्ञान, दैवीय शक्ति, बहादुरी, बुद्धिमत्ता, निःस्वार्थ सेवा-भावना आदि गुणों के साथ भगवान शिव का 11वाँ रुद्र अवतार माना जाता है.

इन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम और माता सीता जी की भक्ति में लगा दिया और बिना किसी उद्देश्य के कभी भी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन नहीं किया.

एक बार किसी साधू जन की मदद के लिए कोशिश की मगर उन्हें लगा की हनुमान जी उनके साथ मजाक कर रहे हैं| गुस्से में आकर उन्होंने भगवान हनुमान की सारी शक्तियों को भूल जाने का शाराप दे दिया.

मगर कुछ देर बाद हनुमान जी के सच बतेने पर साधू जी ने खा की मुझ से गलती हो गयी है मगर शाराप तो वापस नहीं हो सकता, लेकिन जब कभी तुम्हे तुम्हारी शक्तियों के बारे में बताएगा तो तुम्हारी सारी शक्तियां वापस आ जाएगी.

हनुमान जी के भक्तों में उनके लिए बहुत ज्यादा श्रद्धा रखते हैं|

हनुमान जयंती का इतिहास – History of Hanuman Jayanti in Hindi

एकबार, एक महान संत अंगिरा स्वर्ग के स्वामी, इन्द्र से मिलने के लिये स्वर्ग गए और उनका स्वागत स्वर्ग की अपसरा महिलाओं, पुंजीक्ष्थला के नृत्य के साथ किया गया.

हालांकि, संत को इस तरह के नृत्य में कोई रुचि नहीं थी, उन्होंने उसी स्थान पर उसी समय अपने प्रभु का ध्यान करना शुरु कर दिया| नृत्य के अन्त में, इन्द्र ने उनसे नृत्य के प्रदर्शन के बारे में पूछा.

वे उस समय चुप रहे और उन्होंने कहा कि, मैं अपने प्रभु के गहरे ध्यान में था, क्योंकि मुझे इस तरह के नृत्य प्रदर्शन में कोई रुचि नहीं है। यह इन्द्र और अप्सरा के लिए बहुत अधिक लज्जा का विषय था;

उसने संत को निराश करना शुरु कर दिया और तब अंगिरा ने उसे शाप दिया कि, “देखो! तुमने स्वर्ग से पृथ्वी को नीचा दिखाया है| तुम पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में मादा बंदर के रुप में पैदा हो।”

उसे फिर अपनी गलती का एहसास हुआ और संत से क्षमा याचना की। तब उस संत को उस पर थोड़ी सी दया आई और उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया कि, “प्रभु का एक महान भक्त तुमसे पैदा होगा.

वह हमेशा परमात्मा की सेवा करेगा। इसके बाद वह कुंजार (पृथ्वी पर बन्दरों के राजा) की बंटी बनी और उनका विवाह सुमेरु पर्वत के राजा केसरी से हुआ.

उन्होंने पाँच दिव्य तत्वों; जैसे- ऋषि अंगिरा का शाप और आशीर्वाद, उसकी पूजा, भगवान शिव का आशीर्वाद, वायु देव का आशीर्वाद और पुत्रश्रेष्ठी यज्ञ से हनुमान को जन्म दिया.

यह माना जाता है कि, भगवान शिव ने पृथ्वी पर मनुष्य के रुप पुनर्जन्म 11वें रुद्र अवतार के रुप में हनुमान बनकर जन्म लिया; क्योंकि वे अपने वास्तविक रुप में भगवान श्री राम की सेवा नहीं कर सकते थे.

सभी वानर समुदाय सहित मनुष्यों को बहुत खुशी हुई और महान उत्साह और जोश के साथ नाचकर, गाकर और बहुत सी अन्य खुशियों वाली गतिविधियों के साथ उनका जन्मदिन मनाया.

तब से ही यह दिन, उनके भक्तों के द्वारा उन्हीं की तरह ताकत और बुद्धिमत्ता प्राप्त करने के लिए हनुमान जयंती को मनाया जाता है.

हनुमान जी की कहानी – Story of Hanuman Ji in Hindi

हनुमान जी का नाम ही काफी है उनके बारे में बताने के लिए दुनिया उन्हें अच्छी तरह जानती है, मानती है, पूजा करती है.

भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त है| श्री हनुमान जी हनुमान जी ने एक बार तो अपना सीना फाड़ कर ये दिखा दिया था की उनके ह्रदय में भगवान श्री राम और माता सीता वास करते हैं.

हनुमान जी बचपन से ही बाल ब्रह्मचारी है| बाल काल से ही हनुमान जी बड़े शरारती थे और वक्त के अनुसार उन्हें बहुत सारी शक्तियाँ और वरदान मिले.

बचपन से ही हनुमान जी का ह्रदय लोगों की भलाई और उनके लिए रक्षाओं से लड़ने के लिए तत्पर था| हनुमान जी का एक बेटा भी है, अब आप सोचोगे की बाल ब्रह्मचारी होने के बाद बेटा कैसे हो सकता है तो आप हनुमान जी के पुत्र की कहानी पढ़ सकते हैं.

हनुमान पुत्र की कहानी | हनुमान के पुत्र मकरध्वज की कहानी – Son of Hanuman in Hindi

एक समय की बात है जब हनुमान जी श्री राम के लिए समुन्द्र के ऊपर से गुजर रहे थे तो उन्होंने एक बहुत बड़े समुद्र को पार कर दूसरी तरफ लंका के लिए जाना था.

दरअसल इतनी दूर बिना किसी साधन के बिना किसी पुल के जाना बेहद मुश्किल था लेकिन भगवान श्री हनुमान जी के लिए ये बहुत ही छोटा काम था क्योंकि हनुमान जी को पवनदेव से वरदान मिला था की वे जब चाहे जहाँ चाहें वायु में उड़ान भर सकते हैं, तो हनुमान जी ने एसा ही किया वे समुद्र पार चले गए.

हनुमान जी सीता माता को खोजते खोजते अशोक वाटिका में जा पहुंचे और वहां उन्होने माता सीता को देखा, वे एक पेड़ के नीचे बैठी हुई थी वे बेहद उदास थी.

हनुमान जी उन्हें देखते ही समझ गए थे की यहीं सीता माता है, फिर क्या था राम जी ने हनुमान जी को एक अंगूठी दी थी जिसके द्वारा सीता माता ये जान सके की हनुमान जी राम जी के दूत हैं.

अंगूठी देख कर सीता माता पहचान गयीं थी की राम जी समुद्र पार आ चुके हैं उन्हें लेने के लिए|

हनुमान जी चाहते तो माता सीता को जभी अपनी हथेली पर रख कर राम जी के पास तक ले आते मगर ऐसा नहीं हुआ.

हनुमान जी को जभी भूख लग गयी उन्होने अशोक वाटिका में देखा की पेड़ों पर बहुत सारे फल लगे हैं फिर क्या था फल खाते खाते हनुमान जी ने पूरी अशोक वाटिका तहस नहस कर डाली जिस पर रावण के पुत्र मेघनाथ ने उन्हें बंधी बना लिया.

हनुमान जी चाहते तो बंधी नही बनते मगर मेघनाथ ने ब्रह्मास्त्र चला दिया था| जिसकी वजह से ब्रह्मास्त्र की लाज रखते हुए हनुमान जी एक रस्सी में बंध गए.

हनुमान जी चाहते तो वो ब्रह्मास्त्र भी कुछ नहीं कर पता क्योंकि उन्हें ये वरदान मिला था की वे जब तक न चाहे तब तक कोई भी अस्त्र सस्त्र उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है.

हनुमान जी को भरी सभा में बांध कर लाया गया और उनकी पूंछ में कपडा बांधा गया, पूंछ इतनी बड़ी हो गयी की लंका के सारे कपडे कम पद गए, अंत में उनकी पूंछ में आग लगा दी गयी और हनुमान जी ने उस आग के बदले पूरी लंका जला डाली.

पूरी लंका जलाते वक्त एक कक्ष में विभीषण भगवान राम की पूजा कर रहे थे तो उन्होंने विभीषण को कहा की आप अभी लंका छोड़ दे पूरी लंका आग से जल रही है.

तो विभिष्ण ने बात मान ली, हनुमान जी की इतनी मेहनत के बाद वे समुन्द्र में जा कर अपनी पूंछ से आग भुझाने लगे तभी उनके पसीने की एक बूंद मछली के पेट में चली गयी और मछली ने गर्भ धारण कर लिया जिसके फलस्वरूप मकरध्वज का जन्म हुआ| बाद में हनुमान जी और मकरध्वज की एक छोटी सी लड़ाई भी हुई थी मगर हनुमान जी को जब पता चला की ये तो मेरा ही पुत्र है तब हनुमान जी ने मकरध्वज को अपना आशीर्वाद देकर गले से लगा लिया.

प्यारे भक्तों मै आशा करता हूँ की हनुमान जयंती के बारे में जान कर आपको अच्छा लगा होगा|

प्रिय भक्तों अपने मित्रों आदी में हनुमान जी की जयंती के बारे में शेयर करना न भूलें आखिर उन्हें भी तो पता चले हमारे सुपर हीरो, हमारे शक्तिशाली भगवान के बारे में|

|| जय श्री राम, जय श्री हनुमान जी || “धन्यवाद”

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